Thursday, 20 September 2018
Friday, 14 September 2018
चाचा के लंड से चूत की आग को शांत किया
हेल्लो
फ्रेंड्स, मेरा नाम रंजू सिंह है और मैं जन्नत की सारी की सारी देसी स्टोरीज पढ़ती हूँ. मैं आप सबको
अपनी चुदाई की सच्ची देसी कहानी बताने जा रही हूँ कि कैसे मैं अपने चाचा से चुदी. मैं
पहले आपको अपने बारे में बता दूँ, मैं दिखने में बहुत
सेक्सी हूँ और मैं छपरा की रहने वाली हूँ और
कॉल सेण्टर में जॉब करती हूँ. मेरा रंग गोरा है और मेरी चूची और गांड बहुत बड़ी है.
बहुत लोग मुझे लाइन मारते हैं, बहुत लोग मुझसे बात
करना चाहते हैं, असल में वे सब के सब मेरी चुत चुदाई करना
चाहते हैं. मैं वैसे बहुत मजाक करती हूँ अपने ऑफिस में और सब लोग मुझे पसंद भी करते
हैं. यह कहानी मेरी और मेरे चाचा के बीच की है, वो चाचा मेरे पड़ोस में ही रहते हैं, वे मेरे पापा
के चचेरे भाई हैं. और वो मेरे घर आते रहते हैं. हम दोनों लोग एक दूसरे से बातें करते
हैं. पर मुझे यह नहीं पता था कि वो चाचा जिनसे मैं बातें करती हूँ, वो मुझे एक दिन चोद देंगे. अब मैं आपको मेरी कहानी बताती हूँ
जो मेरी सच्ची चुदाई की कहानी है कि कैसे चाचा ने मुझे चोदा. चाचा जब भी मेरे घर आते
थे, वो मुझसे मजाक करते थे और हम दोनों लोग कभी कभी एक दूसरे के
साथ खेलते भी थे लेकिन मैं चाचा के बारे में कुछ गलत नहीं सोचती थी.
लेकिन वो मुझसे बातें करते करते कभी कभी वो मेरी चूची को देख कर मुझे स्माइल देते थे लेकिन मैं उनकी बातों पर ध्यान नहीं देती थी. मुझे ये सब नहीं पता था कि मैं एक दिन चाचा से चुद जाऊँगी क्योंकि मैं चाचा को एक अच्छा दोस्त मानती थी लेकिन वो तो मुझे चोदना चाहते थे. मुझे धीरे धीरे कुछ अजीब सा लगने लगा था क्योंकि चाचा जब भी मुझसे बातें करते थे या जब भी मेरे घर आते थे तो वो मुझे बहुत हवस भरी नजर से देखते थे और मुझसे अकेले में बातें करने की कोशिश करते थे और कभी कभी तो वो मुझे गलत तरीके से छूते भी थे. मैं यह बात अपने घर में किसी से नहीं कह सकती थी क्योंकि सब लोग उनको अच्छा मानते थे और मैं भी चाचा को अच्छा मानती थी.
लेकिन वो मुझसे बातें करते करते कभी कभी वो मेरी चूची को देख कर मुझे स्माइल देते थे लेकिन मैं उनकी बातों पर ध्यान नहीं देती थी. मुझे ये सब नहीं पता था कि मैं एक दिन चाचा से चुद जाऊँगी क्योंकि मैं चाचा को एक अच्छा दोस्त मानती थी लेकिन वो तो मुझे चोदना चाहते थे. मुझे धीरे धीरे कुछ अजीब सा लगने लगा था क्योंकि चाचा जब भी मुझसे बातें करते थे या जब भी मेरे घर आते थे तो वो मुझे बहुत हवस भरी नजर से देखते थे और मुझसे अकेले में बातें करने की कोशिश करते थे और कभी कभी तो वो मुझे गलत तरीके से छूते भी थे. मैं यह बात अपने घर में किसी से नहीं कह सकती थी क्योंकि सब लोग उनको अच्छा मानते थे और मैं भी चाचा को अच्छा मानती थी.
लेकिन
वो कुछ दिनों से मुझसे गलत तरीके से बातें करते थे और मुझसे हमेशा बॉलीवुड की हॉट मूवीज
के बारे में बातें करते थे. चाचा मुझे कभी कभी उनके साथ मूवी देखने के लिए भी बोलते
थे लेकिन मैं चाचा को मन कर देती थी. चाचा मुझसे कभी कभी फ़ोन पर भी बातें करने लगे
थे. मैं चाचा को इसलिए कुछ नहीं बोलती थी क्योंकि वो कभी कभी मेरी हेल्प भी कर देते
थे और कभी कभी मुझे अपनी कार से ऑफिस भी छोड़ देते थे. मेरी चूची बहुत बड़ी हैं,
मैं जब भी चाचा के साथ कार में जाती थी तो वो मेरी बड़ी बड़ी चुचियों
को देखते थे और मजे लेते थे. मुझे यह बात पता चल गयी थी कि चाचा मुझे चोदना चाहते थे
और मैं ऑफिस में बहुत ही सज कर जाती थी और बहुत फैशन करती थी तो लोग मुझे ऑफिस में
भी लाइन मारते थे. मुझे पटा था कि मैं फर्स्ट क्लास का माल हूँ चोदने के लिए!
चाचा
और मैं, हम दोनों धीरे धीरे एक दूसरे के करीब आने
लगे थे. चाचा मुझे बहुत बार व्हाटसप्प पर भी वीडियो काल पर बातें करते थे. लेकिन मैं
उनसे ज्यादा देर तक बातें नहीं करती थी क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि चाचा मुझसे कुछ
गलत बात करें. व्हात्सप्प पर चाचा अब मेरी फिगर की भी तारीफ करने लगे थे, वो मुझे बोलते थे कि तुम्हारी चाची भी अपने आपको बहुत मेन्टेन
रखती है लेकिन तुम्हारी बात कुछ और है. चाचा और चाची दोनों लोग से मेरी अच्छी बनती
थी. चाचा मुझे चोदना चाहते थे और मैं भी अब धीरे धीरे चुदवाने के मूड में आने लगी थी.
मैं भी अब चुदाई की बातें सोचती थी. मैं कभी कभी चाचा के लंड को उनकी पैन्ट में देखती
थी क्योंकि वो जब भी मेरी चूची को देखते थे और मुझसे बातें करते थे तो उनका लंड खड़ा
हो जाता था और मुझे भी अब लंड से चुदवाने का मन करने लगा था.
मैं
अब अपने मोबाइल में हिन्दी पोर्न मूवीज देखती थी और अपनी चूत को अपने हाथ से सहला कर
शांत करती थी. मेरी सहेलियाँ तो रोज अपने बॉयफ्रेंड से चुदवाती थी और मुझे भी बोलती
थी चुदवाने के लिए लेकिन मेरा अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हो गया था लेकिन जब भी मेरा
बॉयफ्रेंड मेरे साथ था तो वो मुझसे सेक्स की बातें करने की कोशिश करता था लेकिन मैं
तब उससे ऎसी बातें नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं तब इन बातों को बुरा मानती थी. लेकिन
अब मैं नए लंड से चुदवाना चाहती थी इसलिए मुझे भी चाचा से चुदवाने का मन करने लगा था.
अब चाचा भी मुझसे खुश रहते थे क्योंकि मैं भी अब चाचा से खुल कर बातें करती थी और वो
भी मुझे अपनी चुदाई के बारे में बताते थे. हम दोनों रात भर एक दूसरे से व्हाटसप्प पर
बातें करते थे. यह बात नहीं मेरे घर में किसी को पता थी कि मैं अपने पड़ोस से चाचा से
व्हाटसप्प पर रात भर बातें करती हूँ. न ही उनकी वाइफ जानती थी वो मुझसे रात भर बातें
करते हैं. चाचा शादीशुदा थे लेकिन मैं उनको पसंद करने लगी थी क्योंकि वो मेरी बहुत
देखभाल करते थे और कभी कभी वो मुझे अपने पैसों से मेरी जरूरत की चीजें मुझे लाकर देते
थे.
लेकिन
मैं नहीं चाहती थी कि यह बात किसी को पता चले कि मैं और चाचा हम दोनों लोग एक दूसरे
से प्यार करते थे. हम दोनों एक दूसरे के साथ एक दो बार फिल्म भी देखने गए थे और वहाँ
पर चाचा ने मुझे किस भी करने की कोशिश की थी लेकिन मैंने उनको मना कर दिया क्योंकि
मैं नहीं चाहती थी कि मुझे और चाचा को किस करते हुए कोई देखे.
चाचा
जब भी मेरे घर आते थे तो वो मैगज़ीन लेकर आते थे जिसमें नंगे लड़के लड़की सेक्स करते हुए
रहते थे और हम दोनों लोग नंगी फोटोज देखते थे. चाचा कभी कभी मुझे अपनी मोबाइल में पोर्न
मूवीज भी दिखाते थे और हम दोनों लोग एक दूसरे को किस भी करते थे जब मेरे घर कोई नहीं
रहता था. हम एक दूसरे को बहुत देर तक किस करते थे लेकिन हम दोनों लोग चुदाई नहीं करते
थे क्योंकि घर में किसी ना किसी के आने का डर लगा रहता था. चाचा जब कभी अपनी वाइफ को
चोदते थे तो मुझे बताते थे लेकिन वो बताते थे कि उनको अपनी वाइफ को चोदने में अब मजा
नहीं आता है और वो मुझे चोदना चाहते हैं.
मैं चाचा को बोलती थी कि हम चुदाई कैसे करें, घर पर कोई न कोई रहता था. एक दिन मैं ऑफिस में काम कर रही थी और चाचा का मेसेज आया कि वो मुझे होटल में खाना खिलाना चाहते थे. मैंने अपने ऑफिस के मेनेजर से छुट्टी ले ली और चाचा से मिलने होटल में चली गयी. वह पर हम दोनों ने खाना खाया और उसके बाद चाचा बोले- आज हम दोनों होटल के रूम में चुदाई करेंगे! लेकिन मैंने अब फिर चाचा को मना कर दिया क्योंकि मैं नहीं चाहती थी मुझे और चाचा को कोई होटल रूम में जाते आते देख ले.
मैं चाचा को बोलती थी कि हम चुदाई कैसे करें, घर पर कोई न कोई रहता था. एक दिन मैं ऑफिस में काम कर रही थी और चाचा का मेसेज आया कि वो मुझे होटल में खाना खिलाना चाहते थे. मैंने अपने ऑफिस के मेनेजर से छुट्टी ले ली और चाचा से मिलने होटल में चली गयी. वह पर हम दोनों ने खाना खाया और उसके बाद चाचा बोले- आज हम दोनों होटल के रूम में चुदाई करेंगे! लेकिन मैंने अब फिर चाचा को मना कर दिया क्योंकि मैं नहीं चाहती थी मुझे और चाचा को कोई होटल रूम में जाते आते देख ले.
चाचा मेरी चिकनी फूली हुई चूत को देख कर कुत्ते की तरह चाटने लगे और मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी. कुछ देर के बाद चाचा ने मेरी चूत को अपनी उंगलियों से थोड़ा खोला और उसके बाद वो मेरी चूत के दाने को चाटने लगे और कभी कभी तो वो मेरी चूत के दाने को अपने दांतों से काट भी रहे थे. मैं और जोर से चिल्ला रही थी क्योंकि तब मुझे दर्द होता था और मजा भी आता था. चाचा बोल रहे थे- यार रंजू , तुम्हारी चूत बहुत अच्छी है! और वो मेरी चूत को बहुत देर तक चूसते रहे. उसके बाद चाचा ने अपना लंड निकाला और मुझे लंड चूसने के लिए बोले. मैं भी चाचा का लंड अपने मुख में लेकर चूसने लगी. मैं चाचा का लंड चूस रही थी और वो मजे लेकर अपनी आँखों को बंद करके मुझसे लंड चुसवा रहे थे. चाचा कभी कभी अपना लंड मेरे मुख में जल्दी जल्दी अन्दर बाहर कर रहे थे तो चाचा झड़ने लगे, उन्होंने अपना लंड मेरे मुंह से बाहर निकाल लिया और सारा माल बाहर ही निकाल दिया. चचा माँ माल मेरी चूची और पेट पर गिरा जिसे चाचा ने मेरी ही पेंटी से पौंछ दिया.
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Thursday, 13 September 2018
कुवारे लंड ने सील पैक बुर को चोदा
मेरा नाम राजेश है, मैं पटना में
रहता हूँ. मेरी उम्र 25 साल है. मैं देखने में साधारण सा ही हूँ. मेरे लंड का आकार भी
5″ का है.
यह बात तब की है, जब मैं करीब बीस साल का था और बी0
ए 0के सेकंड इयर में पढ़ रहा था. अब जो इस कहानी की नायिका है, उसके बारे में भी सुन लीजिए.
उसका नाम कल्पना है. वो देखने में तो ममता
कुलकर्णी की तरह दिखती है.
उसका बदन भरा हुआ है. नयन नक्श तो इतने अच्छे हैं कि
देखने वाला उसे देखते ही मुठ मारने पर आमदा हो जाए. उसका मादक फिगर 32-27-32
का है.. उम्र 19
की है. अभी इतना ही
जब उसको नंगी देखूँगा, तब अन्दर का विवरण लिखूंगा.
एक दिन मेरी मोटर साइकिल खराब हुई पड़ी थी और मुझे कॉलेज में जाना था. मैंने
ऑटो से जाना उचित समझा. मैं ऑटो स्टैंड गया, सुबह का वक्त था.. उस वक्त शोरगुल
भी नहीं था. कुछ देर में ही एक ऑटो रिक्शा मेरे सामने आकर रुका. जैसे ही मैं ऑटो में
बैठा, मुझे
एक मीठी सी आवाज सुनाई दी. मैंने मुड़ कर देखा, तो एक लड़की दौड़ कर आकर ऑटो में बैठ
गई. उसने ऑटो वाले से मेरे ही कॉलेज का नाम बोला, यह सुन कर मेरा मन खुश हो गया. पहली
बार इतनी खूबसूरत लड़की मेरे पास बैठी थी. ऑटो वाले ने ऑटो स्टार्ट किया और हम अपनी
राह पर चल पड़े. उस लड़की का नाम मुझे बाद में मालूम हुआ कि उसका नाम कल्पना है.
कल्पना ने शॉर्ट
टॉप पहना था और नीचे चुस्त काली जींस पहनी हुई थी. वो जींस और टॉप में सच में कहर ढा
रही थी. मैं उसके ही सोच में डूब गया. इतने में एक गड्ढे में से ऑटो निकली और उसका
रेशम सा नाज़ुक बदन मुझसे टकरा गया. मेरे शरीर ने अनोखे अहसास का अनुभव किया. उसने
मुझसे हटते हुए सॉरी कहा और सीधी बैठ गई. मैंने उससे कहा- कोई बात नहीं. हम दोनों एक
बार मुस्कुराए और बातों का सिलसिला शुरू हो गया. उसने मुझे पूछा कि आप किधर जा रहे
हैं. मैंने कॉलेज का नाम बताया तो वो मुझसे खुलने लगी. उसने मेरे बारे में नाम आदि
पूछा. मुझे थोड़ी सी झिझक हुई, मैंने मेरा नाम बताया और कहा कि मैं बी0 ए 0में पढ़ रहा हूँ.
ये सुन कर वो खुश हुई और उसने बताया कि वो इस शहर में नई नई आई है.
वो गडचीरोली के छोटे गाँव से है, यहां रूम करके रहती है. उसने
भी मेरे ही कालेज में आर्ट में एडमीशन लिया है. इतने में हमारा कॉलेज आ गया और हम दोनों
कॉलेज में आ गए. उसने मुझे अपनी क्लास के बारे में बताया, हम दोनों के क्लास ऊपर नीचे थे. मतलब
ऊपर के माले में उसका और ग्राउंड फ्लोर पर मेरा क्लास रूम था.
मैंने उसका फोन नम्बर मांगा, उसने तुरंत दे भी दिया और हम जुदा
हो गए. ऐसे ही हाय बाय में पूरे एक सप्ताह चला गया. बाद में हम दोनों दोस्त बन गए.
हम क्लास बंक मारते और बातें करते रहते. एक दिन शाम के वक्त मैंने उसको कॉल किया और
हमारी बातें शुरू हुईं. कुछ ही समय में हम दोनों एक दूसरे के सामने खुल कर बात करने
लगे. फिर एक दिन बातों बातों में मैंने उसे प्रपोज कर दिया. उसने हंस कर हामी भर दी.
अब रोज रात को हम दोनों की प्यारी प्यारी बातें होती
थीं. हम रोज देर तक बातें करते रहते, इसी तरह धीरे धीरे फोन सेक्स चैट भी होने लगी. वो नंगी
हो कर अपनी चूत में उंगली करती और मैं उसके नाम की मुठ मारता. हम दोनों के शरीर मिलन
की आस में तड़फने लगे थे.
ऐसे ही दिन गुजरते रहे. एक दिन हमें मौका मिल गया. उसका
मकान मालिक 10-15 दिन के लिए गाँव गया था. उसने सुबह ही फोन पर घर आने का न्योता दे दिया. मैंने
भी घर में बोला कि कॉलेज से सीधा दोस्त के घर जाऊंगा और कल सुबह ही आ पाऊंगा. ऐसा बोल
कर मैं घर से निकल गया. रास्ते में मेडिकल स्टोर से से कॉण्डम का बड़ा पैकेट लिया और
सेक्स टाईम बढ़ाने वाली गोलियां ले लीं. एक प्रोविजन स्टोर से कुछ खाने का सामान लिया
और चल दिया. उसके घर के पास जा कर मैंने फोन किया. उसने कहा- आ जाओ, गेट यूं ही उड़का है. मैं
इधर उधर देखता हुआ तेजी से उसके घर की तरफ गया और जल्दी से गेट खोलकर अन्दर घुस गया.
अन्दर आते ही मैंने झट से दरवाज़ा बंद करके उसकी तरफ देखा.
वो खड़ी शर्मा रही थी. मैंने उससे चिपक गया, उससे चिपकते ही मेरे शरीर
में अलग ही रोमांच भर गया. मैं उसकी जवानी के सागर में गोता लगाने लगा. कुछ देर यूं
ही चिपका चिपकी हुई और चुम्माचाटी चालू हो गई. आधा घंटा कैसे बीता, पता ही नहीं चला. इस वक्त
उसने नाईट ड्रेस पहनी हुई थी, चूमा चाटी का दौर खत्म हुआ, तो उसने कहा कि तुम बैठो मैं नहाकर
आती हूँ. मैं भी नहाने के लिए उसके पीछे पीछे चल गया. बाथरूम के पास जाकर वो रूक गयी,
उसने मेरे तरफ एक चुदासी
नजर डालते हुए आँख मारी और बाथरूम में घुस गयी.
अन्दर जाते ही उसने अपने सारे कपड़े उतारे और शावर चालू
कर दिया. मैंने भी देख लिया था कि इसने दरवाजा लॉक नहीं किया था. सो मैं दबे पाँव बाथरूम
की तरफ गया और दरवाजे को थोड़ा धक्का दे दिया. दरवाजे में झिरी से बन गई, अन्दर झाँकने के बाद मैंने
जो नजारा देखा, उससे मेरा लंड आन्दोलन करने पर उतारू हो गया और पेंट फाड़ कर बाहर आने को मचलने
लगा. उसका एकदम नंगा बदन, बदन से फव्वारे का बहता हुआ पानी, उसके सिर से उतर कर गांड की तरफ जाता
हुआ बड़ा मादक लग रहा था. उसका चेहरा दीवार की तरफ था, तो उसने अब तक मुझे नहीं देखा था..
या देखना नहीं चाहती थी.
मैं चुपके से उसके पीछे गया और उसे पकड़ लिया. वो थोड़ा
सकपका गयी, मैं उसके पीछे से पूरा चिपक गया. उसकी भीगी हुई उभरी गांड की दरार पर मेरा लंड
दस्तक दे रहा था. कल्पना भी पूरी तरह से गरम
हो गयी थी और मेरा साथ दे रही थी. मैं उसके गीले बदन से लिपट गया और गीला नंगा बदन
सहलाने लगा. फिर से चुम्माचाटी चालू हो गई. अब धीरे धीरे मैंने मेरे कपड़े पूरे खोल
दिए और नंगा हो गया. कुछ देर बाथरूम में मस्ती करने के बाद मैं कल्पना को अपनी गोद में उठा कर बेड पर ले गया. हम दोनों
गीले बदन थे और बेड पर लेटे लेटे एक दूसरे को सहला रहे थे. मैं किस करते करते उसकी
चुत पर चला गया. आह.. रेशम जैसी चिकनी चुत देख कर चूत पर होंठों को लगा कर मैं बेतहाशा
चूसने लगा. कल्पना वासना से सीत्कार भरने लगी,
बाद में मैंने मेरा
लंड कल्पना के हाथ में दे दिया. उसके मुलायम
हाथों का स्पर्श पाकर मेरा लंड और अधिक फुदकने लगा.
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैं झट से कल्पना की टांगों के बीच में बैठ गया. कल्पना भी गरम हो गयी थी. मैंने झट उसकी चुत की फांकों में
लंड घिसा तो कल्पना मचल उठी. मैंने एक धक्का
लगाया, पर लंड
फिसल कर बाहर को निकल गया. मैंने कई बार कोशिश की, फिर भी लंड चुत में नहीं जा रहा था.
हम दोनों फर्स्ट टाइम सेक्स कर रहे थे तो कुछ परेशानी हो रही थी. कल्पना ने संयम दिखाया और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर
चुत के मुँह पर रख कर धक्का देने को कहा. मैंने वैसा ही किया. लेकिन इस बार भी लंड
कल्पना की चुत में नहीं गया. फिर मुझे लगा
कि क्यों ना कुछ चिकनाई लगा कर लंड अन्दर डालूँ. मुझे जल्द ही उसकी वैसलीन की शीशी
मिल गई. मैंने खूब सारी वैसलीन कल्पना की चुत
में लगा दी और थोड़ी अपने लंड में लगा ली. अब मैंने लंड को फिर से चुत पर सैट किया,
कल्पना ने भी हाथ से लंड को थाम रखा था. मैंने जोर से एक
झटका दे मारा. इस झटके के साथ लंड का सुपारा उसकी चुत की फांकों को चीरता हुआ अन्दर
घुस गया. दर्द के मारे कल्पना की तेज चीख निकली
और वो रोने लगी.
उसका रोना देख कर मैं डर गया. मैंने मेरा लंड बाहर निकाल लिया और कल्पना
को चुप कराने लगा. इसके बाद हम दोनों ने कुछ
नहीं किया. बस यूं ही चिपके हुए लेटे रहे. रात को हम दोनों चिपक कर सो गए. देर रात
को मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि कल्पना मेरे लंड को अपने हाथों में लेकर सहला रही थी. मैंने
उसकी आँखों में देखा तो बस प्यार शुरू हो गया. मैंने उससे पूछा- करना है? उसने कहा- हां करना है. मैंने
कहा- चिल्लाओगी तो नहीं? बोली- हां… चिल्लाऊंगी. मैंने कहा- क्यों? बोली- दर्द होगा तो कैसे चुप रहूँगी?
मैंने कहा- फिर कैसे
होगा? बोली-
तुम इस बार मेरी चिंता मत करना, वो तो एक बार दर्द होगा ही. बस हम दोनों फिर से लग गए. इस बार
मैंने उसकी टांगों को उठा कर अपने कंधों पर ले ली थीं और उसके मुँह पर अपना मुँह लगा
दिया था. उसने भी मेरा लंड पकड़ कर अपनी चुत की फांकों में फंसाया और मैंने उसी वक्त
तेज ठोकर दे मारी. उसकी चीख निकली लेकिन मेरे मुँह के ढक्कन के कारण घुट कर रह गई.
बस कुछ देर भयंकर दर्द हुआ,
लेकिन जैसा कि होता आया है. उसकी गांड ने उठाना शुरू किया तो
मैंने लंड को गति दे दी. धकापेल चुदाई हुई. तभी वो एकदम से अकड़कर झड़ गई और उसकी चुत
की आग से मेरा लंड भी पिघल गया. मैंने भी अपने लंड का लावा उसकी चुत में छोड़ दिया.
जब पानी निकल गया, तब हम दोनों को होश आया कि कंडोम तो लगाया ही नहीं था. खैर अब क्या हो सकता था,
हम लोग हंसने लगे और
दूसरे दिन दवा लेने की बात कहकर हम दोनों फिर से चूत चुदाई की क्रिया में लग गए. उस
रात हम दोनों ने चार बार चुदाई का मजा लिया और चूंकि अब दवा लेने का मन बना लिया था
तो मैंने हर बार उसकी चूत में ही अपना रस छोड़ा.
Password- sex123
Tuesday, 11 September 2018
मास्टरनी साली को जम के चोदा होटल में
पहले मैं आपको मेरी साली के बारे में बता दूँ. मेरी साली
का नाम रानी है, उसका कद 5 फुट 4 इंच है, रंग गोरा… और 36-30-34 की मस्त फिगर है. वो एक सरकारी
स्कूल में पढ़ाती है. उसकी शादी हो चुकी है. वैसे तो मेरी बात अपनी साली से होती ही
रहती थी, फोन
पर हम खूब हंसी मज़ाक करते थे, पर अब तक कभी कोई ग़लत बात नहीं की थी. लेकिन समय के साथ भाव
बदलते चले गए. जब भी मैं उसे देखता तो मेरे मन में होता कि इसे चोद दूँ, पर कैसे… वो जब माने तब ना उसको चोद
पाऊं. एक दिन मैं अपनी बीवी के साथ उसके मायके गया हुआ था. तब वहाँ पर मेरी साली रानी
और उसका पति भी आए हुए थे. वहां पर हम सब मिले,
खूब बातें की और जब
मेरी साली रानी कुछ काम से बाहर गई…
तो मुझे लगा जैसे उसने
मुझे बाहर आने का इशारा किया हो. थोड़ी देर बाद मैं बाहर गया तो वो बाहर वाले कमरे
में बैठी थी. मैंने उससे कहा कि तुम बाहर क्यों आ गईं? तो वो बोली- मैं उधर बोर हो रही थी
इसलिए बाहर आ गई. मैंने कहा- यार हँसी मज़ाक में बोर कैसे हो गईं? वो बोली- कुछ नहीं बस यूं
ही. फिर हम दोनों बैठ कर इधर उधर की बातें करने लगे. शाम को हम वापिस आ गए. कुछ दिन
बाद मेरी बीवी को रहने के लिए मायके जाना था.
इस बीच मेरी कई बार मेरी साली रानी से बातचीत हुई. पर एक बार की बातों में उसके साथ
उस तरह की बातें हुईं, जो उससे पहले कभी नहीं हुई थीं. जैसी इस बार बातें हुईं. इस
बार हम अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में बात करने लगे थे. उसने बताया कि उसकी लाइफ काफ़ी
अच्छी चल रही है. मज़ाक मज़ाक में मैंने कहा- पर जब तुमको देख लेता हूँ, तो मेरी लाइफ कुछ दिन अच्छी
नहीं चलती. उसने हंस कर पूछा- क्यों? मैंने कहा कि तुम्हारी खूबसूरती को देखकर सोचता हूँ कि
काश तुम मेरी बीवी होती. वो बोली- जीजू… साली भी तो आधी घर वाली ही होती है. मैंने तो उसके मुँह
से पहली बार जीजू सुना और ऊपर से ये साली भी आधी घरवाली होती है, वाली बात सुनी थी इससे पहले
वो मुझसे जीजू कहती थी और वो भी बड़े अदब के भाव से कहती थी. इस बार का उसका बोलने का
अंदाज जरा अलग किस्म का था.
मैंने कहा- ऐसे कैसे… सिर्फ़ नाम की घरवाली होती है,
उसके साथ वो सब कैसे
कर सकते हैं, जो बीवी के साथ करते हैं? तो उसने कहा कि इसके लिए हिम्मत होनी चाहिए. मैंने सोचा शायद
ये मेरे लिए ऑफर दे रही है. मैंने उससे पूछा तो क्या तुम तैयार हो, मुझमें पूरी हिम्मत है?
उसने इस पर कुछ नहीं
कहा और हँसने लगी… मैं समझ गया. मैंने उससे कहा कि तुम्हारी बहन मायके जा रही है और मैं 2
दिन बाद तुमसे मिलने
आऊंगा, जहाँ
तुम नौकरी करती हो. उसने कहा- चलो आ जाओ… देखते हैं.
फिर मैं 2 दिन बाद सुबह के समय उसके स्कूल के पास पहुँच गया,
पर वो तब तक नहीं आई
थी. मैं उसका इंतज़ार करने लगा. दस मिनट बाद वो आई तो उसने काले रंग की साड़ी पहन रखी
थी. बड़ी काँटा माल लग रही थी. मैं तो उसे देखता ही रह गया. वो मुझे देखते ही मेरे पास
आई. मैंने कहा- क्या आज बिजली गिराने का इरादा है? वो इठला कर बोली- सब आपके लिए है
जीजू. मैंने उससे पूछा कि चलें कहीं घूमने? उसने कहा- हां चलो. फिर मैंने पूछा-
स्कूल? उसने
कहा- मैंने स्कूल से आज की छुट्टी ले रखी है. फिर मैंने मन में सोचा कि आज तो तेरी
ऐश है और उसकी तरफ देख कर हंस दिया, उसने भी हँसी में जवाब दिया.
हम घूमने के लिए पार्क में आ गए. इस वक्त करीब सुबह के
10 बजे थे.
हमने वहाँ पर बातचीत की, इसी दौरान हमारी सेक्सी बातें शुरू हो गईं. मैंने उससे कहा-
तुझे जब भी देखता हूँ तो मेरा मन करता है, तुझे अभी पकड़ लूँ और जी भर के प्यार करूं, क्या तुम एक दिन के लिए मेरी
बीवी बनोगी? वो बोली- आपको देखकर मेरा मन भी यही करता है. चलिए आज मैं आपकी बीवी बनती हूँ.
उसने बताया कि उस दिन कमरे से बाहर इसी लिए आई थी. इस पर मैंने सोचा कि मौका मैंने
ही गंवा दिया था. मैंने उससे पूछा तो फिर आज अपनी मुराद पूरी कर लें? वो मुस्कुरा कर और अपनी चूचियां
उभारते हुए बोली- कैसे? मैंने उसका हाथ पकड़ा और बोला कि होटल में चलते हैं. उसने कहा
कि कोई देख लेगा? मैंने कहा- यहाँ कौन हमें जानता है. वैसे भी मैंने कमरा बुक करवा रखा है. उसने
कहा- ऐसा क्यों? मैंने कहा- क्योंकि मैं जानता था कि आज कुछ ना कुछ ज़रूर होगा. हम दोनों होटल में
आ गए. मैंने कमरे में कुछ खाने को मँगवाया. खाना खाकर हम दोनों बैठे.
मैं उससे चिपक कर बैठ गया और उसके होंठों को चूमने लगा.
वो भी मेरे होंठों को चूमने लगी. मैं अपने हाथ से उसके ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी मोटी
मोटी चुचियों को दबाने लगा. वो भी मज़े में आने लगी और मेरे होंठों को ज़ोर ज़ोर से
चूसने लगी. मैंने उसकी साड़ी उतारी और उसको बेड पर लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गया. उसके होंठों
को चूसते हुए मैंने एक हाथ से उसके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए. उसके ब्लाउज के
हर एक बटन खुलने के साथ उसकी चुचियां मुझे और साफ दिखने लगतीं. ब्लाउज के सारे बटन
खुलने के बाद उसकी चुचियां एक नाम मात्र की ब्रा में क़ैद थीं और उस ब्रा में वो कयामत
ढा रही थी. मैंने उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसकी चुचियों को दबाने लगा. उसके निप्पल
कड़े होते जा रहे थे, जो एक अंगूर के दाने की तरह कड़े हो गए. वैसे उसकी 6 महीने की गुड़िया भी है, जिस वजह से उसके चूचों में
दूध भी आता है. मैंने उसके चूचों को दबाते हुए मज़े लेने लगा तो वो कसमसा सी गई और
सिसकारियां भरने लगी. वो बोली- आ आहह आह… प्लीज़ चूसो इन्हें प्लीज़ जीजू चूसो ना अपनी आज की बीवी
के चूचों को… जी भर के चूसो… आह खाली कर दो इन्हें… मैं भी जोश में आ गया और मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में भर
कर दम से उसे चूसने लगा. वो कामुकता से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाजें निकालने लगी. उसकी चुचियों से दूध बह रहा था,
जिसे मैं सारा पी गया.
उसका दूध किसी अमृत से कम नहीं लग रहा था, जिसे मैं सारा का सारा पिए जा रहा था. इसी बीच वो बोले
जा रही थी- आह जीजू इन्हें चूसो… नोंचो इन्हें… आह मज़ा आ रहा है… मेरा सारा दूध पी जाओ… मैं उसके मम्मों को पीता
रहा. करीब 15 मिनट बाद वो झड़ गई, उसके बाद उसने मेरा लंड पकड़ लिया. मेरा लंड खड़ा था और इस अवस्था
में वो काफ़ी बड़ा हो गया था. मैंने जल्दी से अपनी पैंट निकाली और शर्ट भी निकाल दी.
अपना लंड उसके हाथ में देते हुए कहा- क्यों साली साहिबा, क्या इसे लेने का इरादा पक्का कर
लिया है. उसने कहा- इसी के लिए तो आज सज कर आई थी जीजूजी मेरे जानू. मैंने कहा- तो
फिर चूसो ना! वो बोली- आपका इतना बड़ा लंड मेरे मुँह में नहीं आएगा. मैंने कहा- चूसो
तो… जितना आएगा
उतना चूसो… फिर तो ये अपनी जगह अपने आप बना लेगा. वो बेड से उतर कर घुटनों पर आ गई और मेरा
लंड चूसने लगी. वो मेरा लंड ऐसे चूस रही थी, जैसे कोई रंडी चूसती हो. मैंने उससे
पूछा- क्या तुमने पहले भी किसी का लंड चूसा है? वो बोली- हां इनका लंड कभी कभार चूस
लेती हूँ… पर मज़ा नहीं आता. मैंने कहा- आज तो मज़ा आ रहा है ना! वो बोली- मेरे एक दिन के
पतिदेव… तभी
तो इसे लॉलीपॉप की तरह चूस रही हूँ. मैं आह… कहते हुए लंड चुसाता रहा. वो मेरे
लंड को ऐसे ही चूसती रही, मेरा भी शरीर अकड़ने लगा. मैंने उससे कहा- मैं होने वाला हूँ.
वो मेरे लंड को और ज़ोर से चूसने लगी और अंत में मैं उसके मुँह में ही झड़ गया और वो
मेरा सारा माल पी गई. इसके बाद कुछ देर लेटने के बाद हम दोनों फिर से तैयार हो गए.
अब मैंने उसकी चूत को चूसने का मन बनाया. मैं उसकी चूत चूसने लगा और उसके मुँह में
मैंने फिर से अपना लंड डाला. इस तरह हम 69 की पोज़िशन में आकर एक दूसरे को चूसने लगे.
कुछ देर बाद वो बोली- जीजू प्लीज़ अब इसे डाल भी दो…
काफ़ी समय से आपका
लंड अपनी चूत में लेने के लिए तरस रही हूँ. फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया और उसकी टांगों
के बीच जाकर उसकी चूत पर अपना लंड फेरा और बोला- तू कितने दिन से नहीं चुदी है?
वो बोली- दो महीने
से नहीं चुदी हूँ… पर आज जी भर के चोद दो, कई दिनों से चाहती थी कि आप मुझे चोदो. मैंने कहा- साली अगर
तेरा मुझसे चुदने का इतना मन करता था तो पहले क्यों नहीं कहा, मैं भी कब से यही चाहता था.
मैंने अपने लंड को उसकी चूत में डाला उसे थोड़ा सा दर्द हुआ क्योंकि काफ़ी समय बाद
चुदाई करवा रही थी. मैंने उसके होंठों को चूमते हुए एक और धक्का लगाया, जिससे मेरा पूरा लंड उसकी
चूत में चला गया. जैसे ही मैं उसकी चूत में धक्का मारता तो उसकी चुचियों में से दूध
बाहर आ जाता. मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, उसकी सिसकारियां और चूचों में से
दूध साथ साथ निकल रहा था, जिससे उसकी चुचियां एकदम दूधिया सी हो गई थीं. ऐसी लग रही थीं,
जैसे अभी अभी दूध में
डुबा कर निकाली हों. वो भी अपनी कमर उठा उठा कर चुदाई का मज़ा ले रही थी और ज़ोर ज़ोर
से चिल्ला रही थी कि चोदो और ज़ोर से अब जाकर इस फुद्दी में ठंडक पड़ी आहह उहह उहह
आहह ओह मेरे राजा पूरी अन्दर तक जा रहा है… तुम्हारा लंड और ज़ोर से चोदो फाड़
दो मेरी चूत को मेरे कमीने पतिदेव… आज अपनी एक दिन की गंदी पत्नी को जी भर के चोदो. मैं भी उससे
गंदी गंदी बातें करने लगा- साली कमीनी तेरा पति तुझे अच्छे से नहीं चोदता, जो तू मुझसे चुद रही है.
तो वो बोली- चोदता तो है पर ऐसा नहीं चोदता… साला जल्दी निपट जाता है और मैं प्यासी
रह जाती हूँ. फिर मैंने उसे ज़ोर से चोदता हुआ उसके ऊपर लेटकर उसकी चुचियों में टपकते
हुए दूध को पीने लगा. नीचे से मैं उसकी चूत को भी चोद रहा था. इस बीच वो 2 बार झड़ गई, पर मैं अभी भी उसे चोद रहा
था. करीब 20 मिनट बाद मैंने अपना सारा माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी ऊपर लेट गया.
थोड़ी देर बाद उठकर हम दोनों बाथरूम में गए और वहाँ पर भी जमकर उसकी चुदाई की. हमने
उस दिन 2 बार
और चुदाई की,
फिर मैंने उसकी 3 बजे उसे बस स्टैंड पर छोड़ा और वो अपने घर चली गई. शाम को उसका मैसेज आया- आज का
दिन काफ़ी अच्छा रहा… आई लव यू जीजू… तो मैंने उसे रिप्लाई किया- आई लव यू टू… ऐसा अच्छा दिन आगे भी आ सकता है,
अगर तू चाहे तो. उसका
मैसेज आया- हां क्यों नहीं मौका मिला तो ज़रूर आ जाऊंगी.
Saturday, 8 September 2018
पडोसी से चूत चुदवाई खेत में
दोस्तो, मेरा वास्तविक नाम सुमन है, मैं 28 साल की देशी पढ़ी लिखी औरत हूँ. पर 8 साल पहले मेरी शादी एक छोटे
गांव में अनपढ़ विरेश के साथ हुई. विरेश मुझसे 10 साल बड़ा है. यह बात उस समय की है,
जब मेरी शादी को 2
साल हो चुके थे. मेरी
खेती में सोहन पड़ोसी है जो मेरे 4 साल छोटा है, पर दिखने में बड़ा सांड है.
मैं थोड़ी पतली हूँ, एकदम बारीक कमर और मोटी गांड वाली
परी हूँ, दिखने
में बड़ी सेक्सी और कटीली माल लगती हूँ. मैं हमेशा सेक्सी साड़ी और लोकट गले और छोटी
आस्तीन का ब्लाउज पहनती हूँ, जिस कारण मेरा पेट और नाभि और चिकने हाथ हमेशा रंडी के जैसे
खुले रहते हैं. ऊपर से पतले कपड़े के ब्लाऊज से तो मेरे मम्मों के निप्पल जो एकदम काले
अंगूर की तरह हैं, ऊपर से ही साफ दिखते हैं. इसलिए जो भी मुझे देखता है, उसका लंड खड़ा हो जाता है.
मैं रोज ऐसा ही मेकअप करके सोहन के खेत में काम पर जाती हूँ और सोहन को पटाने की कोशिश करती हूँ. पर सोहन मेरे पर ध्यान ही नहीं देता था, शायद वो लोक लाज के कारण
डरता था. मैं रोज ही निराश होकर घर लौट आती थी. पर आज मेरा सपना पूरा होने की घड़ी आ
गई थी, आज सोहन
के बड़े भाई की शादी थी और मैं अपने पति विरेश
के साथ शादी में जाने वाली थी. इसलिए आज मैंने
नेट की नई साड़ी और कट ब्लाउज पहना था, जिस कारण मैं पूरी छिनाल लग रही थी. बारात वाला ट्रक
पूरी तरह से भरा हुआ था, उसमें आदमियों की संख्या के हिसाब से जगह बहुत कम थी. इसलिए
मैं ट्रक के फाल्के की बाजू में बैठी थी. फाल्के के ऊपर मेरे पति विरेश और सोहन चिपक के बैठे थे. मैं दोनों के पांव के बीच में फिट
हो गई थी.
इस वक्त मुझे मालूम था कि मेरा पल्लू सरका हुआ था और
मेरे मम्मे, निप्पल ऊपर से ही एकदम साफ दिख रहे थे.. तब भी मैंने अपने पल्लू को ठीक करने की
कोशिश नहीं की. रास्ता थोड़ा खराब था, इसलिए जब भी ट्रक किसी गड्डे में आने से हिलता तो मेरे
मम्मों के काले निप्पल तक ब्लाऊज के बाहर निकल आते थे. पर दोस्तो इससे भी कुछ फायदा
नहीं हो रहा था.. क्योंकि सोहन कुछ भी रिस्पॉन्स
नहीं दे रहा था.
जैसे तैसे इस हालत में ही हम सभी शादी वाले गांव पहुंच
गए. फिर शादी में पूरा दिन निकल गया, पर सोहन ने मेरी
गांड को हाथ तक नहीं लगाया. जबकि मैं उसके आस पास ही रही. दोस्तो अब वक्त आ गया था
मेरे सपने पूरे होने का.. रात हो गई थी और शादी भी हो चुकी थी. हम सभी वापस अपने गांव
जाने के लिए निकल पड़े थे. इस बार मेरे पति विरेश सोहन से
दूर बैठे थे और सोहन फाल्के पे बैठा था. मैं
जानबूझ कर सोहन के पांव के पास बैठ गई थी और
ट्रक के चलने का इंतजार कर रही थी. कुछ देर बाद ट्रक चल पड़ा था, रात के दस बजे थे.. हमारे
गांव तक 250 किलोमीटर सफर लंबा था, इसमें पूरी रात लगने वाली थी. कुछ ही देर में ट्रक में पूरा
अंधेरा हो गया था, किसी को कुछ नहीं दिख रहा था. चूंकि सब लोग थके हुए थे, सो सोने लगे थे. मैं अंधेरे का फायदा
उठा कर सोहन के दोनों पांवों के बीच में घुस
गई. सोहन फाल्के पे था और मैं नीचे बैठी थी
इसलिए मेरा सर सीधा सोहन की जाँघों में घुस
गया था. मैं भी सोने का नाटक कर रही थी और मुझे पूरा यकीन था कि अब सोहन कुछ भी नहीं कर सकता.
मैंने अपना मुँह सीधा सोहन के लंड पे रख दिया और सोने का नाटक करके अपने गाल
से उसके मस्त लंड को दबाने लगी. सोहन को लगा
कि मैं नींद में हूँ, इसलिए गलती से मेरा सर उसके लंड पर आ गया होगा. पर मेरा गाल का स्पर्श होते ही
सोहन सोया हुआ लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा.
मैं भी खुद को रोक नहीं रही थी. मैंने सीधा मेरे होंठ सोहन के गधे जैसे बड़े लंड पे रख दिए. मुझे पेंट के ऊपर
से सोहन के लंड का फूलना पता चल रहा था. आज
मैंने जाना कि सोहन का लंड मेरे पति विरेश
से दो गुना बड़ा था. अब सोहन भी खुद को रोक नहीं सकता था. मेरे होंठ के स्पर्श
ने सोहन के डर को भगा दिया था. सोहन ने अंधेरे का फायदा उठा कर धीरे-धीरे पांव निकाल
कर सीधा मेरी जाँघों पर रख दिया और साड़ी के ऊपर से अंगूठा चलाते हुए धीरे-धीरे मेरी
चुत पर रगड़ने लगा. अब मैं समझ गई थी कि सोहन भी गरम हो गया है. मैं इस मौके को छोड़ने वाली नहीं
थी. अब मैंने सीधा सोहन का पांव पकड़ कर सीधा
अपनी चुत पे दबा दिया. इससे सोहन समझ गया था
कि मैं सब जानबूझ कर कर रही हूँ. सोहन ने बिंदास
साड़ी के साथ पूरा अंगूठा मेरी चुत में डाल दिया. “हूँ हू हूँ हू हूँ हू..” क्या बताऊं दोस्तो,
मैं बहुत गरम हो गई
थी, मुझे बहुत
मजा आ रहा था. फिर मैंने अपनी साड़ी का पल्लू सोहन की जाँघों पे डाल दिया ताकि किसी को पता ना चले और
मैंने सीधा सोहन की चैन खोलकर उसका गधे जैसा नौ इंच का लंबा लंड बाहर
निकाल लिया. ट्रक में पूरा अंधेरा हुआ था, किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था. मैं लंड को हिला रही
थी. अब सोहन ने बेधड़क मेरी चुत से अंगूठा निकाल
कर मेरी नाभि पर लगा दिया और नाभि के छेद को रगड़ने लगा. मुझे बहुत मजा आने लगा था.
सोहन ने सीधा मेरा सर अपने लंड पे दबा दिया.
मुझे बहुत डर भी लग रहा था कि कोई देख ना ले, पर उसका गधे जैसा बड़ा लंड को देखकर
मैं खुद को रोक नहीं सकती थी. मैंने सीधा पल्लू के अन्दर सर डाल के लंड का टोपा मुँह
में ले लिया. सोहन को अपने लंड पर मेरे मुँह
के अहसास ने गरम कर दिया और उसने जोर से मेरा सर दबा कर अपना पूरा लंड मेरे मुँह में
पेल दिया. उसका मूसल लंड मेरे गले तक घुस गया था और मैं जोर से लंड चूसने लगी. सोहन
भी जोर से मेरा मुँह चोदने लगा था और मैं भी
सोहन को पूरा साथ दे रही थी. मैं उसका पूरा
लंड अपने मुँह में अन्दर बाहर कर रही थी. मैंने ब्लाउज के बटन खोलकर सोहन का पांव पकड़ कर अपने मम्मों पर टिका दिया,
वो अपने पांवों से
मेरे मम्मों को रगड़ने लगा. मैं जोर जोर से लंड चूस रही थी, बड़ा मजा आ रहा था. तभी सोहन का संयम छूट गया और लंड ने जोर की पिचकारी मेरी मुँह
में मार दी. “अह अह अह… अअह..” उसका पूरा माल पेट में चला गया था. लंड झड़ जाने से सोहन थोड़ा ठंडा हो गया था, पर मैं तो एकदम गरम हुई पड़ी थी. मेरी
चुत में जबरदस्त खुजली हो रही थी. सोहन ने
मुँह से लंड निकाल कर मेरे गाल से रगड़ कर साफ किया और पेंट में डाल कर चैन बंद कर ली.
अब उसने अपने पांव से मुझे धकेल दिया. उसकी इस हरकत पर मुझे बहुत गुस्सा आ गया,
पर मैं कुछ कर नहीं
सकती थी.
मैं भी अपनी साड़ी ठीक करके घर पहुंचने का इंतजार कर रही
थी अब सुबह के 6 बजे थे और ट्रक गांव में आ गया था. दिन निकल आया था और सोहन मुझसे आँखें नहीं मिला रहा था, वो शर्मा रहा था. पर मैंने
सब की नजर बचा के मुस्कुरा के सोहन को आँख
मार दी, सोहन
डरता हुआ हल्के से मुस्कुराता हुआ निकल गया.
मैं भी पति विरेश के साथ घर चली गई थी. दूसरे
दिन सुबह दस बजे विरेश दूसरे खेत में काम पर
गया था और मैं आज छिनाल जैसी नई साड़ी और कट ब्लाउज पहन कर सोहन के खेत की ओर निकल पड़ी. सोहन का गधे जैसा मोटा लंड मेरी नजर से हट ही नहीं रहा
था. मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि आज उसका गधे जैसा लंड मेरी कोमल चुत में घुसकर हाहाकार
मचा देगा क्योंकि इतना बड़ा लंड मेरी चुत ने पहले कभी नहीं देखा था. मेरे पति विरेश
का लंड तो बिल्कुल किसी दस साल के बच्चे के
जैसा लुल्लीनुमा है. उसका टुन्नू सा लंड मेरी प्यासी जवान काली झांटों में छिपी हुई
चुत का लाल दाना देखते ही फेल हो जाता है. साले का पानी निकल जाता है और मुझे तड़पता
छोड़ देता है.
पर आज मेरी भूख मिटने वाली थी, ऐसे सपने देखते हुए मैं खेत
में आ गई. सोहन खेत में मेरा रास्ता ही देख
रहा था. मेरे सर पर रोटी की टोकरी थी. सोहन ने जैसे मुझे देखा, खुद झटके से मेरे सर से टोकरी को
नीचे रख दिया और मुझे बांहों में लेकर चुम्बन लेने लगा. वो दोनों हाथ पीछे डाल के मेरी
गांड के गोले किसी आवारा जानवर की तरह दबाने लगा. मैं डर गई थी और मैंने धीरे से कहा-
सोहन जी, रूको ना किसी ने देख लिया तो बहुत
लोचा होगा. इस बात से सोहन को गुस्सा आ गया
और सोहन बोला- चुप कर छिनाल.. साली रात में
पूरे भरे ट्रक भर में लोगों के बीच में मेरा लंड चूसते हुए तुझे डर नहीं लगा.. और इधर
खाली खेत में डरने का नाटक कर रही है रंडी… यहां मेरे अलावा तुझे चोदने कोई भी
नहीं आएगा साली.. आज से तू मेरी रखैल है समझी. इस तरह की बातों के दौरान ही सोहन ने मेरी साड़ी को खोलकर फेंक दिया. अब मैं सिर्फ ब्लाऊज
लहंगे पर सोहन की बांहों में थी. मैं हंसते
हुए बोली- सोहन जी, मैं तो कबसे आपकी रखैल बनने के लिए
तड़प रही हूँ. बस इतने में सोहन ने मुझे पीछे
धकेल दिया, मैं जमीन पर गिर गई और मेरा लहंगा पूरा ऊपर हो गया. सोहन मेरी सांवली जाँघों और काली चड्डी को देख कर गर्म
हो गया. सोहन भी पूरा नंगा हो कर नीचे बैठ
कर कुत्ते जैसे मेरी पेंटी को खींचने लगा. अगले ही पल मैं सोहन के सामने नंगी हो गई थी. मेरी बड़ी बड़ी काली झांटों
में छिपी हुई चुत सामने थी. सोहन ने झांटों
में उंगली डाल कर चुत का लाल दाना सहलाया और दो उंगली से पकड़ कर जोर से दबा दिया. जैसे
ही मेरी चुत का दाना खींचा, वैसे ही मेरे मुँह से आवाज निकल पड़ी- उन्म्म… सोहन जी प्यार से प्लीज! पर सोहन मेरी बात सुनने के मूड में नहीं था, उसने मेरी टांगों को फैला
कर चुत में मुँह डाल दिया और कुत्ते के जैसे मेरी चुत पर टूट पड़ा. मुझे बहुत मजा आ
रहा था. मैं एक हाथ से सोहन का सर चुत पे दबा
रही थी और उसी वक्त दूसरे हाथ से अपने ब्लाउज के बटन खोल कर अपनी चूचियों को आजाद कर
दिया. मैं उत्तेजित हो गई थी और अपनी उंगली से अपनी काली निप्पल दबाने लगी. मेरे मुँह
से आवाज निकल रही थी- आह.. सोहन जी.. आप कितना
अच्छे से चुत चाटते हो.. और चाटो.. अंदर तक जीभ पेल दो.. आह.. इससे सोहन का हौसला बढ़ने लगा था. सोहन अपनी पूरी जुबान से मेरी चुत को लगभग चोदने सा लगा
था. इसी के साथ वो अपना एक हाथ ऊपर करके बारी बारी से दोनों मम्मों को भी दबाने लगा.
मुझे इस वक्त बहुत मजा आ रहा था. मैं गांड उठा कर उसका साथ दे रही थी और बोल रही थी-
आह.. सोहन जी पूरी जुबान घुसेड़ दो ना प्लीज..
आज अपनी इस रखैल को पूरी रंडी बना दो जान.. अब सोहन सीधा मेरे ऊपर चढ़ गया और उसने अपना लंबा लंड मेरे
मुँह में ठोक दिया. वो 69 की पोजीशन में होकर मेरी चुत चाटने लगा और बड़ा लंड मेरे गले
से भी आगे जाने की सोच रहा था. सोहन की बड़ी
बड़ी काली झांटें मेरी नाक में घुस रही थीं, तो कुछ गाल पर चुभ रही थीं. मुझे
बहुत मजा आ रहा था. मेरे मुँह से कामुक आवाज निकल रही थीं. कुछ ही देर में सोहन ने मेरी चुत को पूरी तरह से गीली कर दिया था और मैंने
लंड को लसलसा बना दिया था. फिर सोहन ने सीधा
होकर मुझे सीधा लेटा दिया और मेरे जाँघों को खोल कर अपने लंड पे थूक लगा दिया. उसने
कुछ थूक मेरी चुत पर भी टपका दिया. सोहन मुझसे
बोला- साली रंडी, आज मैं तुझे चोद कर मेरे बच्चे की माँ बना दूँगा. मैं हंसते हुए बोली- मेरे मालिक
मैं कब से माँ बनने के लिए तड़प रही हूँ.
आज अपना पठानी लंड पेल कर मेरी कुंवारी चुत को औरत का
दर्जा दे दो सोहन जी. सोहन हंसते हुए बोला- हां छिनाल, आज तुझे चोद के मेरी रखैल
बना लूँगा और मेरे बच्चे की माँ भी बना दूँगा. सोहन ने लंड को चुत की फांकों पर रगड़ा और एक जोर का झटका
मार दिया. एक ही झटके में उसके लंड का टोपा मेरी चुत में घुस गया. मैं जोर से चिल्लाने
लगी- उई माँ मर गई मालिक.. धीरे धीरे करो प्लीज नहीं तो मेरी चुत फट जाएगी. पर सोहन
ने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया और दोनों हाथों
से मेरे मम्मों को पकड़ा और बेदर्दी से मींजने लगा. इसी के साथ सोहन ने जब दूसरा झटका लगाया, तब उसका पूरा लंड मेरी चुत में घुस
गया. मैं जोर से चिल्लाने लगी- मालिक धीरे धीरे करो.. प्लीज मर गई अह अह अह.. अअह अअह..
सोहन मेरी बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे
रहा था और जोर जोर से लंड को झटका लगा कर मेरी चुत फाड़ने में लगा हुआ था. आठ दस धक्कों
के बाद मुझे भी बहुत मजा आने लगा था और मैं भी गांड उठा उठाके उसका पूरा लंड अन्दर
बाहर करने लगी थी. अब मैं बोले जा रही थी- आह.. सोहन जी आज अपनी रखैल की चुत की वाट लगा दो. मेरी बात
सुन कर सोहन का हौसला बढ़ रहा था और जोर से
झटके देकर पूरा मजा देने लगा. सोहन मेरे मम्मों
पर झुक कर मेरे शहद से भरे होंठों पे अपने होंठ रख कर चूसने लगा. उसने मेरे मुँह में
थूक गिरा दिया और अपनी जुबान घुसेड़ कर अंदर खलबली मचाने लगा. उसकी जीभ घुसी तो मेरे
मुँह में थी लेकिन मुझे नीचे चुत में बहुत मजा आ रहा था. नीचे वो अपने गधे जैसे मोटे
काले पठानी लंड से मेरी चुत चोद रहा था और ऊपर मेरा मुँह को उसकी जुबान चोदने लगी थी.
मैंने सोहन को बांहों में लिया था और सोहन
मुझे बाजारू रंडी के जैसे चोद रहा था. मैं
पूरा मजा ले रही थी, मेरी चुत पूरी लाल हो गई थी. इसी तरह सोहन ने बिना रूके 15 मिनट तक हचक कर चोदा और जोर की गरमागरम
लंड की पिचकारी मेरी चुत में मार दी. उसकी गरम धार मेरी चुत में घुसते ही मेरी 8
साल की प्यासी चुत
एकदम से तृप्त हो गई थी. मैंने सोहन को टांगों
में जकड़ लिया था. दो मिनट के बाद सोहन ने लंड
को निकाल लिया. अब उसने मेरे चूचों पर बैठ कर लंड होंठों पे रख दिया और बोला- ले सुमन
रंडी, लंड चाट कर जल्दी साफ कर साली…
मुझे घर जाना है. मैं
अपनी कुतिया जैसी जुबान निकाल कर उसका लंड मजे चाटने लगी. फिर सोहन ने प्यार से गाल पर थप्पड़ मार के कहा- सुन री रंडी…
आज से तू मेरी रखैल
है समझी. मैंने भी सर हिला कर ‘हां’ कर दिया. फिर सोहन कपड़े
पहन कर काम पे निकल गया और मैं भी कपड़े पहन कर घर चली गई.
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