बच्चा डिलेवरी व लेबर पेन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया - जन्नत

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बच्चा डिलेवरी व लेबर पेन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारिया


नार्मल डिलिवरी के लिए पांच आसान उपाय
पर्याप्‍त मात्रा में पानी पीना आपके लिए हो सकता है फायदेमंद।
व्‍यायाम आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
अच्‍छा और स्‍वस्‍थ भोजन आपके और शिशु दोनों के लिए जरूरी।
अपनी सेहत का खयाल रखें ताकि आप रहें बीमारियों से दूर।

सिजेरियन के बाद बहुत ज्‍यादा देखभाल की जरूरत पड़ती है, और अगर सही से देखभाल न कि गई तो यह आपके लिए ही खतरा बन सकता है। इसलिए जहां तक संभव हो नॉर्मल डिलिवरी ही करवानी चाहिए। इससे आपका शरीर भी ठीक रहता है और आपको कम खतरों का सामना करना पड़ता है।नार्मल डिलिवरी सिजेरियन डिलिवरी से ज्‍यादा सही होती है। क्‍योंकि सिजेरियन डिलिवरी करवाने पर स्‍ट्रैच मार्क्‍स आते है। साथ ही सिजेरियन डिलिवरी के बाद कई बातों का ध्‍यान रखना पड़ता है। जबकि नार्मल डिलिवरी में ऐसी कोई भी बड़ी समस्‍या नहीं आती। इसलिए ज्‍यादातर गर्भवती महिलाएं सिजेरियन डिलिवरी नहीं, बल्कि नार्मल डिलिवरी करवाना पसंद करती हैं।
कैसे हो नार्मल डिलिवरी
1. अपने स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखें बच्‍चे को जन्‍म देते वक्‍त आपको बेहद पीड़ा सहनी होती है और यह आसान नहीं होता। अगर आप कमजोर हैं और आप में खून की कमी है तो आपके लिए यह काफी मुशकिल होगा। इसलिए अपने स्‍वास्‍थ्‍य का पूरा-पूरा ध्‍यान रखें। ताकि आपको उस वक्‍त कम से कम तकलिफ हो।
2. अच्‍छा भोजन करें गर्भवस्‍था के दौरान आपने डॉक्‍टर के कहे अनुसार ही भोजन करें। नार्मल डिलिवरी में आपके शरीर से दो से तीन चार सौ एम.एल. ब्लड जाता है। इसलिए ताकत और पोषण के लिए खाने में ज्‍यादा से ज्‍यादा पोषक तत्‍व खाएं। प्रेगनेंसी में आयरन और कैल्‍शियम की बहुत जरुरत पड़ती है इसलिए जितना भी हो सके अपने आहार में इसे जरुर शामिल करें।
3. शरीर में पानी की कमी से बचें आपके गर्भाशय में शिशु एक तरल पदार्थ से भरी हुई झोली एमनियोटिक फ्लयूड में रहता है। जिससे बच्‍चे को ऊर्जा मिलती है। इसलिए आपके लिए रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीना बहुत जरुरीहै। इससे आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होती।
4. पैदल चलें और टहलते रहें गर्भवति महिलाओं के लिए आराम जरूरी है, लेकिन इसका अर्थ अपने काम से जी चुराना नहीं है। कोशिश करें आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में ज्‍यादा फर्क न आए। दफ्तर और घर के काम सामान्‍य रूप से ही करती रहें। पैदल चलना और टहलना आपके लिए अच्‍छा रहेगा। बाजार तक जाना हो तो कार या किसी वाहन के स्‍थान पर पैदल ही जाएं तो बेहतर। ऑफिस में भी जरा घूम-फिर लिया कीजिए।
5. एक्‍ससाइज अगर आप प्रेगनेंट होने के पहले से ही रोजाना एक्‍ससाइज करती आ रहीं हैं, तो नार्मल डिलिवरी होने के चांस बढ़ जाते हैं। गर्भवस्‍था के दौरान आप कोई फिटनेस सेंटर ज्‍वाइंन कर सकती है, जो आपकी मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण दे सके। प्रसव के दौरान मजबूत मासपेशियों का होना बहुत जरूरी है।
इन उपायों को आजमाने से आपको स्‍वस्‍थ गर्भावस्‍था तो मिलेगी ही साथ ही आपका प्रसव भी काफी आरामदेह तरीके से हो सकेगा। याद रखिए, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने का कोई विकल्‍प नहीं है। इससे गर्भावस्‍था के दौरान आप स्‍वस्‍थ रहती हैं और आपका बच्‍चा भी स्‍वस्‍थ पैदा होता है।


नॉर्मल डिलीवरी कैसे होती है 
बच्चे का जन्म नार्मल हो यह महिला को पहले से प्लान कर लेना चाहिए। नॉर्मल डिलीवरी में खाने एवं पीने के लिए अनुमति होती है इसमें महिला को अधिक लेबर पेन होता है। वहीँ जब महिला को ऑपरेशन करके डिलीवरी कराई जाती है तो सब कुछ मना कर दिया जाता है जैसे खाना -पीना आदि। महिला को ये ध्यान देना चाहिए कि लेबर पेन के वक़्त उसको कैसा फील हो रहा है| जिससे उसे किस रूम में ले और उसकी उस समय की कंडीशन क्या है और डॉक्टर की टीम को इसका ख्याल होना चाहिए कि आपको ऑपरेशन से डिलीवरी या नॉर्मल डिलीवरी चाहिए ताकि आपको उस रूम में ले जाया जा सके। महिला को नॉर्मल डिलीवरी के बाद बच्चे का गर्भनाल काटने के बाद बच्चे को माँ के सीने से लगा कर हीट देने के लिए दे दिया जाता है। इसके बाद बच्चे को सारे और काम किया जाना शुरू कर दिया जाता है जैसे बच्चे को क्या -क्या देना चाहिए फीडिंग से लेकर सुलाने तक सभी चीजों का विशेष ध्यान रखना होता है। 


नॉर्मल डिलीवरी के लक्षण

डिलीवरी के समय महिला के मन में हर समय येही बात चलती रहती ही की उसका बच्चा किसे होगा , डिलीवरी नार्मल हो सकेगी या नहीं| एसे कोई भी पर्याप्त लक्षण नहीं है जिससे आपको बाते जा सके की आपकी डिलीवरी नार्मल होगी या नहीं , पर अगर आप शुरुआत से ही अपने किसी डॉक्टर के संपर्क में है तो वो माँ और बच्चे के स्वास्थ को देखकर बता सकते है की नार्मल डिलीवरी के कितने चांस है 
• नॉर्मल डिलीवरी के समय महिला को रीढ़ की हड्डियों में बेहद दर्द शुरू होता है इसके लिए महिला को चलने के लिए कहा जाता है। 
• normal delivery नॉर्मल डिलीवरी के वक़्त महिला को वेजाइनल डिस्चार्ज होने लगता है। 
• नॉर्मल डिलीवरी के वक़्त माहवारी के दर्द जैसा अनुभव होता है। 
• डिलीवरी के समय पेट में ऐठन महसूस करना। 
• कमर के नीचे दबाव से महसूस करना 
• नॉर्मल डिलीवरी के वक़्त योनि और anus के बीच के परत खुल जाती है जिससे बच्चा आसानी से बाहर आने लगता है ऐसी अवस्था को नॉर्मल डिलीवरी कहते हैं।


नार्मल डिलीवरी करने के उपाय
अगर डिलीवरी होने के समय पर आपको प्राकृतिक प्रसव मतलब नॉर्मल डिलीवरी चाहिए तो आपको कुछ बातों को फॉलो करना होगा जिससे आप सिजेरियन डिलीवरी में होने वाले दर्द से और बाद में होने बाले खतरों से बच सकते हो.
 1.अगर चाहती है नार्मल तो डॉक्टर से लेते रहें सलाह--- नॉर्मल डिलीवरी के लिए नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेते रहें। ऐसे समय में डॉक्टर न केवल आपका मनोबल बढ़ाते हैं बल्कि डिलिवरी संबंधित जितने भी डर हैं उनको दूर करते हैं। डिलिवरी संबंधित यदि आपके दिल में कोई बात है तो उसे बताएं। बात को अंदर दबाने से केवल गुस्सा बढ़ता है जिसके कारण तनाव बढता है। इधर उधर की बातो पर ध्यान न दे, इस दौरान आप दोस्तों, रिश्तेदारों तथा अपने पड़ोसियों से भी बातें कर सकते हैं। हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही कोई भी चीज़ का सेवन करे
2.सैर सपाटा दिलाएगा नार्मल डिलीवरी ----प्रेगनेंसी में महिला को पैदल टहलना सबसे बढ़िया तरीका है नॉर्मल डिलीवरी के लिए, दिन में कुछ समय सैर-सपाटे के लिए निकालें। इससे आप न केवल खुद को रिलेक्स महसूस करेंगे बल्कि ताजी हवा आपके और आपके बच्चे के लिए सुकून का काम करेगी। आप चाहे तो सुबह या शाम कुछ समय अपने घर के आसपास पार्क में टहल सकती हैं।
3. नियमित रूप से व्यायाम करें नॉर्मल डिलीवरी के लिए ----ज्यादातर देखा गया है कि गर्भावस्था में महिलाओं को आराम करने के लिए कहा जाता है, लेकिन आराम के साथ-साथ यह जरूरी है कि अपने आप को स्वस्थ्य रखने के लिए क्या-क्या कर रही हैं। दरअसल प्रेग्नेंसी मांसपेशियों का स्वस्थ्य और मजबूत होना बहुत जरूरी है क्योंकि इससे प्रसव के दौरान पीड़ा से लड़ने में मदद मिलती है। ध्यान रखें कि व्यायाम करते समय ज्यादा भारी चीजों को न उठाए और किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें। सेहतमंद नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक्सरसाइज और योगा करने से दर्द कम होता है अगर आप गलत तरीके से कोई व्यायाम कर रही हैं तो यह आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है और नॉर्मल डिलीवरी में भी बाधक हो सकता है ।
4.पर्याप्त नींद लेना है जरुरी -----पर्याप्त, अबाधित और अच्छी नींद नॉर्मल डिलविरी में कई तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा सोने से दो घंटे पहले चाय या कॉफी का सेवन मत कीजिए।
5. अगर चाहती है नार्मल डिलीवरी तो तनाव से दूरी बनाए ---------तनाव लेना एवं डिप्रेशन में जाना किसी भी अच्छे काम में रुकावट बन सकता है। यही बात आपके गर्भावस्था में भी लागू होती है। तनाव गर्भावस्था में काम्प्लकेशन को भी बढ़ाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव आपके व आपके बच्चे की सेहत पर पड़ेगा। यह एक ऐसा दौर होता है जब आपको शांत और संतुलित रहने की जरूरत है। इसके लिए टीवी पर अच्छा प्रोग्राम देख सकती हैं या फिर कोई अच्छी बुक पढ़ सकती हैं। इसके अलावा आप नकारात्मक चीजों पर ज्यादा ध्यान न दें। 
6.ध्यान और सांस लेने वाले प्राणायाम --------- प्रेग्नेंसी में नॉर्मल डिलीवरी हो इसके लिए आप सांस लेने वाले प्राणायाम कर सकती हैं। इसका फायदा यह होता है कि उचित और पर्याप्त ऑक्सीजन बेबी को मिलती रहती है, जिससे बच्चे का सही तरह से विकास भी होता है। इसलिए नियमित रूप से ध्यान और सांस लेने वाले प्राणायाम कीजिए।
7. प्रेग्नेंसी के दौरान न हो पानी की शरीर में ----------गर्भावस्था के दौरान यह ध्यान रखिए कि शरीर में पानी की कमी न हो। पानी केवल आपको हाइड्रेटेड ही नहीं रखता बल्कि नोर्मल डिलिवरी पाने में आपकी सहायता भी करता है। गर्भवती महिला को हर दिन रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीना सेहतमंद होता है और पानी की कमी दूर होती है//
8. प्रेग्नेंसी में खानपान का विशेष ध्यान रखें ----------प्रेग्नेंसी में आप क्या खा रहे हैं और क्या नहीं खा रहे हैं यह भी आपके नोर्मल डिलिवरी योगदान देते हैं। ऐसी अवस्था में आप सही समय पर सही आहार खाएं। प्रेगनेंसी में आयरन और कैल्शियम की कमी नहीं होनी देनी चाहिए इसके लिए हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए.अपने आहार में जूस, अंडा और फल आदि को शामिल करें। इससे आपको और आपके पेट में पल रहे बच्चे को प्रोटीन और विटामिन मिलते रहेंगे। आप आपने डॉक्टर की सलाह से डाइट ले सकती है
9-टहलना ---------एक वक्त था जब गर्भावस्था में महिलाओं को चलने-फिरने से भी मना कर दिया जाता था. पर प्रेग्नेंट होने का मतलब बीमार होना बिल्कुल नहीं है. भारी काम करना आपको नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन हिलना-डुलना बंद कर देना सही नहीं है.

लेबर पेन के बारे में जो आप नहीं जानतीं
दूसरे चरण में सर्विक्स पूरी तरह से खुल जाता है।
बच्चे का जन्म हो जाने के बाद भी संकुचन होता रहता है।
लगातार गर्भ की पेशियों में खिंचाव महसूस हो, तो डॉक्‍टर के पास जाएं।
लंबी सांस लेने की प्रक्रिया को अपनाकर आप इस दर्द को कम कर सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में लेबर पेन का अनुभव हर महिला के लिये अलग-अलग होता है। इसका कोई निश्चित ढंग नहीं होता है जिससे आप यह समझ सकें कि यह लेबर का दर्द है। लेकिन, हम आपको बता रहे हैं प्रसव के बारे में कुछ ऐसी बातें, जिनके बारे में शायद आपने पहले न सुना हो। प्रेग्नेंसी के आखिरी हफ्ते में गर्भाशय में ऐंठन महसूस होती हैं जिसे फॉल्स लेबर कहते हैं, आमतौर पर सभी महिलाओं को होता है। फॉल्स लेबर प्रसव के कुछ देर पहले ही होता है इसलिए महिलाओं के लिए यह जानना मुश्किल हो जाता है कि ये फॉल्स लेबर हैं या रीयल लेबर पेन है। आमतौर पर लेबर के तीन स्टेज होते हैं। आइए जानें उनके बारे में।
पहला स्टेज
इस स्टेज में सर्विक्स (गर्भाशय का निचला हिस्सा) फैलकर खुलने लगता है साथ ही इसमें वैजाइना से हल्के रंग का ब्लैड पास होता है। इस स्टेज के अंत में सिकुड़न ज़्यादा तेज हो जाती है और ये प्रक्रिया लम्बे समय तक चलती है।
दूसरा स्टेज
इस स्टेज में सर्विक्स पूरी तरह से खुल जाता है, और बच्चे को वैजाइना से बाहर आने के लिए मदद की जरूरत होती है। यह वह अवस्था होती है जब डॉक्टर आपको तब तक पुश करने के लिए कहता हैं जब तक बच्चे का जन्म नहीं हो जाता। इस प्रक्रिया में दो घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक लग सकता है।
तीसरा स्टेज
बच्चे का जन्म हो जाने के बाद भी संकुचन होता रहता हैं और गर्भनाल निकलता है। इस समय होने वाला संकुचन बच्चे के जन्म के पहले होने वाले संकुचन (कॉन्ट्रैक्शन) की तरह ही होता है लेकिन इसमें दर्द कम होता है। ये स्टेज कुछ सेकेंड से लेकर 15-20 मिनट तक रहती है।
डॉक्टर से संपर्क करें
जब लगातार और थोड़ी-थोड़ी देर पर गर्भ की पेशियों में खिंचाव महसूस हो। इसके अलावा जब यह अधिक समय तक और तीव्रता से हो।
अगर आपके कमर के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत हो।
आपका बच्चा तरल पदार्थ की एक थैली से सुरक्षित रहता है। यह प्रसव पीड़ा के दौरान टूटता है और पानी गिरना शुरु हो जाता है। यह प्रसव का ही एक लक्षण है।
अगर रक्त स्त्राव की समस्या हो रही हो।
आपको बुखार, सिरदर्द या पेट में दर्द हो। लेबर को आसान कैसे बनाएं बहुत सी महिलाएं लेबर पेन को लेकर काफी डरी रहती हैं, लेकिन कुछ बातों को ध्यान रखकर आप अपनी डिलिवरी को आसान बना सकती हैं।
लंबी सांस लेने की प्रक्रिया को अपनाकर।
लोकल और इन्ट्रावेनस दवाओं के जरिए।
इंजेक्शन के जरिए जो बॉडी के निचले हिस्से में होने वाले दर्द को रोक देता है।

उम्‍मीद है कि इस लेख के पढ़ने के बाद आपको लेबर से जुड़ी कई ऐसी बातें जानने को मिली होंगी जिनके बारे में आपको पहले शायद नहीं सुना होगा। इन्‍हें जानने के बाद आपके लिए प्रसव का समय ज्‍यादा सुविधाजनक हो सकता था।


प्रसव के दौरान दर्द से राहत पाने के उपाय
दर्द से राहत पाने के लिए सकारात्‍मक सोच है बेहद जरूरी।
दर्द इस बात का संकेत है कि प्रसव का समय करीब है।
मालिश भी दर्द से राहत दिलाने में करती है मदद।
टहलना भी आपके लिए हो सकता है काफी लाभकारी।

किसी नये जीवन को इस दुनिया में लाना कोई आसान काम नहीं। प्रसव के दौरान महिला को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ सकता है। यह दर्द इस बात का संकेत होता है बच्‍चे का जन्‍म किसी भी समय हो सकता है। हालांकि यह दर्द बेहद तकलीफदेह होता है, लेकिन फिर भी इससे राहत पाने के लिए कुछ काम किये जा सकते हैं। प्रसव में दर्द होना स्वाभाविक है। लेकिन, इसे दूर करने के लिए आपको डॉक्‍टर की सलाह के बिना कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। प्रसव का दर्द आमतौर पर केवल 5 मिनट में एक बार होता है। प्रसव के समय होने वाला दर्द प्रसव का संकेत होता है। प्रसव के खिंचाव को झेलने के लिए महिला को बच्चेदानी की मांसपेशियों को ढीला छोड़ देना चाहिए। दरअसल, दर्द के समय बच्चेदानी की मांसपेशियों को दबाकर रखने से प्रसव में रुकावट आती है। आइए जानें कैसे प्रसव के दौरान दर्द से राहत मिल सकती है।

महिलाओं को प्रसव के दौरान होने वाले दर्द से भयभीत नहीं होना चाहिए। हमेशा अपनी सोच को सकारात्मक बनाये रखें।
प्रसव का दर्द जितना अधिक होगा प्रसव का समय उतनी ही नज़दीक आएगा और मां को दर्द से निजात मिलेगी।
यदि गर्भाशय की मांसपेशियां सही तरह से काम नहीं करती तो प्रसव के समय अधिक दर्द तथा रक्तस्राव होता है।
यदि महिला प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को सहजता से ले तो इसके कारण बच्चे का जन्म शीघ्र व आसानी से हो जाता है।
प्रसव के दर्द से भयभीत महिलाओं के शरीर में हो सकती है ऑक्‍सीजन की कमी। जिससे प्रसव के लिए ऑपरेशन की नौबत आ जाती है।
प्रसव के दौरान दर्द से राहत पाने के लिए प्रसव से पूर्व मां का हल्‍के कदमों से टहलना लाभकारी होता है।
प्रसव का दर्द शुरू हो या जब दर्द बन्द हो जाए तो पेट के नीचे के भाग को हाथों से पकड़कर दबाना चाहिए।
प्रसव के समय महिलाएं दीवार के सहारे खड़ी हो सकती हैं।
दर्द से बचने के लिए दीवार के पास खड़ी होकर हाथों को सीधा करना चाहिए।
कुर्सी पर महिलाएं घुटने को मोड़कर बैठ सकती हैं या फिर कुर्सी पर टांगों को चौड़ा करके बैठे तथा नीचे के शरीर को ढीला छोड़ देना चाहिए।
घूमने के दौरान यदि थकान होने लगे तो व्रजासन में बैठना आपके लिए होता है फायदेमंद।
महिलाओं को प्रसव के दर्द से बचने के लिए हमेशा अपने नीचे का भाग ढीला रखना चाहिए और मांसपेशियों में किसी भी प्रकार का तनाव होना चाहिए।
प्रसव के समय लम्बी सांस लेना चाहिए, सांस को कुछ देर रोककर छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से प्रसव सरलतापूर्वक हो जाता है।
प्रसव के समय महिलाओं को हल्के हाथ से अपने पेट को नीचे की ओर दबाना चाहिए तथा नाभि के पास ले जाकर उसे समाप्त करना चाहिए।
प्रसव के समय बीच -बीच में पैरों और टांगों की भी मालिश करनी चाहिए। मालिश के समय सबसे पहले टखनों से घुटनों तक की मालिश करनी चाहिए यदि जांघों में दर्द हो तो ऊपर भी मालिश करनी चाहिए।
बच्चे के जन्म के समय महिलाओं के कमर में अधिक दर्द होता है। सिर के नीचे और दोनों पैरों के नीचे तकिया रखना चाहिए तथा कमर की मालिश करवानी चाहिए। मालिश करते समय कमर को दबाना चाहिए। स्‍त्री को इसलिए सृजक कहा जाता है क्‍योंकि वह स्‍वयं असहनीय पीड़ा को सहन कर एक नवजीवन को इस संसार में लेकर आती है। लेकिन, फिर भी ये कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्‍हें अपनाकर इस दर्द को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।


प्रसव के बाद भी महिला को हो सकती है दर्द की समस्‍या
प्रसव की जटिलताओं की वजह से हो सकती है दर्द की समस्‍या।
गर्भावधि के बाद सामान्‍य स्थिति आने में लग सकता है समय।
सिजेरियन के टांकों के कारण भी हो सकती है टीस और जलन।
रक्‍तस्राव के बाद गुर्दे के दर्द से राहत पाने के लिए क्रीम लगायें। 

महिला को गर्भावस्‍था के दौरान तो देखभाल की जरूरत होती ही है, लेकिन प्रसव के बाद भी उसे काफी संभलकर रहना पड़ता है। गर्भावस्‍था के दौरान शरीर में हार्मोन परिवर्तन के कारण कई बदलाव होते हैं, लेकिन प्रसव के बाद भी शरीर में कई प्रकार के बदलाव आते हैं। प्रसव के पहले सप्‍ताह में शरीर में बहुत परिवर्तन होता है जिसके कारण असहनीय दर्द होता है। युटरस में दर्द महसूस हो सकता है, खासकर स्तनपान कराने पर क्योंकि इससे युटरस सिकुड़ने लगता है। स्तनों में दर्द भी महसूस हो सकता है। आइए हम आपको प्रसव के बाद होने वाले दर्द से निपटने के बारे में जानकारी देते हैं।

डिलीवरी के बाद क्‍यों होता है दर्द
प्रसव उपरान्त कुछ जटिलतायें हो सकती हैं। इसमें कुछ हैं - एक्लेम्पसिया (प्रसव के बाद पहले दो दिन या 48 घंटे के अंदर) संक्रमण और रक्त स्राव (तेज रक्त स्राव) होता है। संक्रमण, प्रायः दीर्घकालीन प्रसव वेदना या कोशिकाओं के समय से पहले डैमेज होने के कारण संक्रमण होता है, साफ-सफाई के कारण भी ऐसा हो सकता है। यदि संक्रमण ज्‍यादा हो गया है तो बुखार, सिरदर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, योनि के रिसाव से बदबू आना तथा उल्टी व दस्त होना शुरू हो जाता है। रक्तस्राव प्रसव के बाद दस दिन या इससे अधिक दिनों के बाद भी हो सकता है। रक्‍तस्राव के दौरान रक्‍त में पीलापन हो जाता है इससे खून की कमी और नासूर हो सकता है। डिलीवरी के बाद यूटरस अपने सामान्‍य अवस्‍था में आता है जिसके कारण कोशिकायें सिकुड़ती हैं इसकी वजह से दर्द होता है। प्रसव के 3 से 5 दिनों के बाद आपके स्तन दूध से भर जाएंगे। आपके स्तन सख्त और पीड़ादायक हो सकते हैं। कभी-कभी स्तनों से दूध टपक भी सकता है।

प्रसव के बाद दर्द से बचने के तरीके
प्रसव के बाद दर्द और ऐंठन होना सामान्य है, इससे घबराना नही चाहिए। धीरे-धीरे यह ठीक हो जाता है।
यदि सिजेरियन हुआ है तो टांकों के कारण जलन और टीस हो सकती है। जब भी आपको लगे कि इसे बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा है, दर्द की दवा ले सकती हैं।
रक्तस्राव के कारण गुदा में होनेवाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए स्प्रे या क्रीम जैसी किसी दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
संक्रमण और गंध को रोकने के लिए योनि और गुदा के आसपास के हिस्से (पेरीनियल पार्ट) को हमेशा साफ सुथरा रखें।
पेरीनियल पार्ट के दर्द पर काबू पाने के लिए इस हिस्से को गर्म पानी से सेंक सकते हैं। प्रसव के बाद पहले दिन के दर्द और सूजन को कम करने के लिए अपने योनि और गुदा के आस पास के हिस्से पर थोड़ी-थोड़ी देर के लिए बर्फ का पैक रखें।
गुनगुने पानी से स्नान करें। अपने बच्चे को जन्म देने के 24 घंटे के बाद नहाना शुरू कर सकते हैं।
अपने सेनिटरी पैड को नियमित रूप से बदलते रहें।
अपने हाथ साबुन और पानी से साफ रखें, दिन में हाथों को बार-बार साफ कीजिए। इसके अलावा खान-पान का विशेष ध्‍यान रखें और प्रसव के बाद भी नियमित जांच के लिए डॉक्‍टर के पास जाते रहें।


जानें प्रसव के बाद महिला के लिए कितना उपयोगी है घी का सेवन
घी अपने आप में संपूर्ण आहार है।
इसमें सारे पोषक तत्व मौजूद होते हैं।
ये जोड़ों के बीच की चिकनाई बढ़ाता है।
माताओं के दूध में पोषक-तत्व को पूरा करता है।

प्रसव के बाद महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना काफी जरूरी हो जाता है जिसके लिए डॉक्टर कई सारी हिदायत देते हैं। ऐसे में हेल्दी खाने के लिए महिलाओं को घी का उपयोग करना चाहिए। गाय का शुद्ध देशी घी स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। गाय का घी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के कारण अधिकतर डॉक्टर प्रसव के बाद महिलाओं को इसका सेवन करने की हिदायत देते हैं। घी में वेजिटेबल ऑयल की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं। इस कारण रोजाना घी का एक बार सेवन करना जरूरी है। ऑलिव ऑयल के बाद घी ही स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। लेकिन घी का अधिक उपयोग भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। वैसे किसी भी चीज की अति स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ही होती है। प्रसव के बाद महिलाओं को अधिक कैलोरी वाला भोजन नहीं करना चाहिए। खासकर अधिक तैलीय पादर्थों का तो सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। लेकिन प्रसव के बाद महिलाओं को स्वास्थ्य के लिए अच्छा भोजन करने की भी जरूरत होती है। ऐसे में डॉक्टर घी से बनी चीजों का सेवन करने की हिदायत देते हैं।
होता है अधिक फैट लेकिन घी में बहुत अधिक फैट भी होता है। इस कारण इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए। वर्तमान में स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रसव के बाद महिलाओं को घी का इस्तेमाल सतर्क रहकर करने बोलते हैं। घर की बड़ी-बूढ़ी औरतें तो नई बनी माताओं को घी का इस्तेमाल अधिक करने बोलती हैं। ये माताओं के दूध को पोषक-तत्व प्रदान करता है। लेकिन घी का अत्यधिक इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।
क्यों करें घी का इस्तेमाल प्रसव के बाद महिलाओं के जोड़ों के बीच की चिकनाई कम हो जाती है। इसलिए कैल्शियम युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। घी में बने इन खाद्य पदार्थों से अधिक मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होते हैं।
लेकिन ना करें आधिक इस्तेमाल प्रसव के बाद घी का अत्यधिक इस्तेमाल की तरह की परेशानियां भी पैदा करती हैं उनमें ये तीन समस्याएं सबसे पहले होती हैं- 1. मोटापा 2. हृदय की समस्या 3. कोलेस्ट्राल लेवल बढ़ जाता है।
माइग्रेन वाली महिलाएं जरूर घी खाएं जो महिलाएं माइग्रेन की मरीज हैं वो प्रसव के बाद घी का इस्तेमाल जरूर करें।


प्रसव के समय अस्‍पताल ले जाने वाले सामान
प्रसव और पहचान संबंधी जरूरी कागज साथ जरूर रखें।
अपने और शिशु के लिए सामान की लिस्‍ट तैयार करें।
खाने पीने के लिए पौष्टिक और जरूरी सामान ले जाएं।
ढीले वस्‍त्र अपने बैग में जरूर डालकर साथ ले जाएं।

अस्‍पताल जाते समय आपको दो बैग पैक करने चाहिए। इनमें एक में वह सामान होगा जिनकी जरूरत आपको प्रसव के समय पड़ सकती हैं व दूसरे में प्रसव के बाद जरूरत पड़ने वाले सामान को रखा जा सकता है। हमारी आपको सलाह है कि जैसे आप गर्भावस्‍था के नौंवे महीने में प्रवेश करें, आपको अपना सभी सामान तैयार कर लेना चाहिए। क्‍योंकि इस दौरान आपको तय तिथि से पहले भी अस्‍पताल जाना पड़ सकता है। आइए जानें कुछ ऐसे सामान की लिस्‍ट जो आपको प्रसव के समय अस्‍पताल ले जाना चाहिए । एक फोटो पहचान पत्र, जैसे आपका वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि... और अगर आपने स्‍वास्‍थ्‍य बीमा करवा रखा है, तो उसका कार्ड साथ जरूर लेकर जाएं। यह सब सामान आपके काफी काम आ सकता है। इसके अलावा भी आपको काफी सामान की जरूरत पड़ सकती है।
चश्‍मा
अगर आपको चश्‍मा लगा हुआ है तो उसे जरूर साथ लेकर जाएं। भले ही आप कान्‍टेक्‍ट लैंस का इस्‍तेमाल कर रही हों। एक बाथरोब, एक-दो नाइट गाउन, चप्‍पलें और जुराबें। यह सब सामान आपको अपने साथ लेकर जाना चाहिए। कुछ हॉस्पिटल गाउन, जुराबें आदि मुहैया कराते हैं, लेकिन अधिकतर महिलायें यह सब सामान अपने साथ ही लेकर जाना अधिक पसंद करती हैं। एक खुला और आरामदेह गाउन ही चुनें, ऐसा जो अगर मैला भी जाए, तो आपको फिक्र न हो। यह गाउन या तो बिना बाजुओं का हो, अथवा उसकी बाजुएं बेहद छोटी हों, ताकि रक्‍तचाप जांच में किसी तरह की परेशानी न हो। आपको लेबर के दौरान चलना पड़ सकता है, ऐसे में चप्‍पलें और रोब उस समय आपके काम आ सकते हैं।

तकिया
बेहतर होगा आप अपने साथ घर से ही तकिया लेकर जाएं। तकिया का गिलाफ रंग-बिरंगा रखें ताकि वह हॉस्पिटल के तकियों के साथ मिक्‍स न हो जाए। आप अपने साथ संगीत सुनने या कुछ खेलने का सामान भी ले जा सकती हैं। और अगर किसी प्रियजन की तस्‍वीर भी साथ रख लें, तो क्‍या बात है। यानी कुछ भी ऐसा सामान जो आपको रिलेक्‍स कराने में मददगार हो।

आपका साथी
आपका साथी अपने साथ एक कैमरा अथवा वीडियो कैमरा, उसकी बैटरी, चार्जर और मैमोरी कार्ड ले जा सकता है। इससे आपके जीवन की सबसे बड़ी खुशी का पहला पल हमेशा के लिए कैद करने में आसानी होगी। अगर आप फोन पर ही तस्‍वीरें खींचने का इरादा कर रहे हैं, तो इस बात का पूरा ध्‍यान रखें कि उसकी बैटरी पूरी तरह चार्ज हो।

टॉयलेटरीज
आरामदेह जूते और कुछ आरामदेह कपड़े।
 स्‍नैक और पढ़ने अथवा देखने के लिए कुछ सामान।
पैसे अथवा कार्ड। पार्किंग के छोटे से खर्चे से लेकर अस्‍पताल के बिल तक आपको धन की जरूरत पड़ेगी।
अगर आप लेबर के दौरान नहाना चाहती हैं, तो अपने साथ एक बाथिंग सूट जरूर रखें। इस दौरान अगर आप चाहें तो अपने साथी की भी मदद ले सकती हैं।

प्रसव के बाद
एक फ्रेशन नाइट गाउन।
फोन ताकि आप अपने करीबियों को इस खुशखबरी की जानकारी दे सकें।
प्रसव के लंबे घंटों के बाद आपको काफी भूख लग रही होगी। बेहतर रहेगा अगर आप अपने घर ही स्‍नैक्‍स लेकर जाएं।
अपने लिए सूखे मेवे, नट्स, ताजा फल आदि लेकर जाएं।
अपने साथ टूथब्रश और टूथ पेस्‍ट, बाम, कंघा और हेयर बैंड, साबुन, शैंपू से सामान ले जाना न भूलें।

बच्‍चे के लिए
बच्‍चे के लिए नये कपड़े। इसमें सिर के लिए टोपी जरूर हो। वरना हवा लगने से वह बीमार हो सकता है।
कंबल। हालांकि अस्‍पताल में कंबल मिलता है, लेकिन घर ले जाते समय आपको अपने कंबल की जरूरत होती है। आप अपने प्रसव की तारीख से लगभग दो या तीन सप्ताह पहले से ही अपने साथ अस्पताल ले जाने वाले सामानों की पैकिंग शुरू कर दे। ताकि अस्पताल जाने के अंतिम समय सामानों की पैकिंग को लेकर होने वाले तनाव और जल्दबाजी से बचा जा सके।


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