यह कहानी उन दिनों की हैं जब मैं पटना में एक दवा कंपनी में काम कर रहा था, मेरी उम्र यही कोई 25
वर्ष होगी,
मुझे मेडिकल कॉलेज
का काम मिला था। मैं थोड़ा गंभीर, संकोची किस्म का लड़का हूँ। अपने काम की वजह से मुझे काफी डॉक्टरों
और रेजिडेंस डॉक्टरों से जान-पहचान हो गई थी।
पटना में मेरा
अपना कोई नहीं था और काम बोलने तथा रिज़र्व रहने के कारण मेरे अपने कार्यक्षेत्र के
मित्र कम ही थे इसलिए मैं काम से फुरसत के क्षणों में मेडिकल कॉलेज की तरफ ही चला जाता
और कॉलेज कैम्पस क्षेत्र में एक रेस्तराँ था, वहीं शाम को कुछ हल्का और कॉफी या
चाय पीता था।
एक दिन की बात है 5’4″ लम्बी लड़की जो एक रेजिडेन्ट डॉक्टर
थी, रेस्तराँ
में मिली और बोली- यहाँ कैसे? तो मैं बोला- मैम, मैं अक्सर सप्ताहांत में मैं यहाँ आता हूँ, क्योंकि पटना में मेरे कोई नहीं है और मैं कोई दोस्त भी नहीं बना
पाया हूँ। इसलिए फुरसत के क्षणों में यहीं आ जाता हूँ। मेरा समय भी पास हो जाता है
और आप सबों से मेरी मुलाकात हो जाती है। उसके बाद वे मेरे पास ही टेबल पर बैठ गई तथा
एक दूसरे के बारे में बात होने लगी। यह सिलसिला लगभग काफी दिनों तक चला। लड़की का नाम
बबिता कुमारी था जो सिवान की रहने वाली थी, आकर्षक व्यक्तित्व की धनी थी। हम
दोनों काफी अच्छे दोस्त बन गए और काफी खुलकर बातें होने लगी थी और हमारे कंपनी के कुछ
प्रोडक्ट पुरुष और स्त्री इंफेर्टिलिटी से संबंधित भी थी तो उस पर थोड़ा बातचीत होने
लगी। मेरा सब्जेक्ट साइंस नहीं था तो वो मुझे ह्यूमन एनाटॉमी एंड फीजियोलॉजी के बारे
में बताती।
एक दिन शनिवार था, मैं 4:30 के आस-पास मेडिकल कॉलेज के रेस्तराँ
में पहुँचा, वो डॉक्टरनी बबिता भी पहुँची। थोड़ा समय
पास होने बाद मैं वापिस अपने रूम को लौटने के लिए विदा ले रहा था कि बीच में ही टोकते
हुए बोली- राज, आज थोड़ा पहाड़ियों के तरफ चलते हैं। तो मैं बोला- मैम शाम ढलने को है, अभी हम दोनों पहाड़ी पर क्या
करेंगे. तो वो बोली- आज एकांत में बैठने की इच्छा हो रही है, चलो पास के कैंसर अस्पताल
के पहाड़ी पर ज्यादा नहीं, थोड़ी देर ही बैठेंगे। उनके आगे मेरी एक भी न चली और स्कूटर पर
बैठ कर चल दिया। आज वो मुझसे चिपक कर बैठी थी, उनके स्तन का अहसास मुझे मेरी पीठ
पर हो रहा था। हम दोनों पहाड़ी पर पहुँचे, देखा कि सूर्य अपनी लालिमा को समेटे अस्त होने को था।
चारों तरफ धीरे धीरे अंधेरा बढ़ रहा था। कैंसर अस्पताल के पार्किंग क्षेत्र में स्कूटर
पार्क कर अस्पताल के पास पार्क के एक शिला पर हम दोनों बैठ गये। बबिता मेरे काफी करीब बैठी हुई थी, वो मेरे कंधे पर अपना सिर
और मेरे एक हाथ को अपने हाथ में लेकर बात करने लगी, बोली- काफी थक गई हूँ, इसलिए सोचा कि तुम्हारे कंधे
पर अपना सर रखकर थोड़ा आराम कर लूं, इस लिए तुझे लेकर यहाँ आ गई। मैं उनके बालों को एक हाथ से सहलाने
लगा। मेरे जीवन में पत्नी के बाद बबिता पहली
लड़की थी जो मेरे इतने समीप बैठी थी। मेरी तो हालात भी खराब हो रही थी। लिंग में धीरे
धीरे तनाव और दिल बेईमान हो रहा था। लगभग 45 मिनट बीत जाने के बाद मैं बोला- अब
हमें चलना चाहिए क्योंकि काफी अंधेरा हो रहा है। बबिता बोली- यार, अभी दिल भरा नहीं! लेकिन मैं तो अपने
आप को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था।
इन सारी बातों के बीच मैं एक बात आपको बताना भूल ही गया
कि बबिता की बनावट 32-30-32 थी, साथ दूधिया गोरी,
काली आँखें और भूरे
बाल… बड़ी ही
कयामत दिखती थी। कोई भी उसे देख कर आहें भरने लगता था। मैं बोला- बबिता , आखिर तुम चाहती क्या हो?
कब तक हम यों यहाँ
पड़े रहेंगे। मैंने घड़ी देखी तो सात बजने को थी। मैं जैसे ही उठने को हुआ, उनका एक हाथ मेरी जीन्स के
ऊपर से ही मेरे कड़क लिंग पर आया और उन्होंने तुरंत मेरे लिंग को ऊपर से ही पकड़ लिया,
बोली- ये क्या?
तुम तो बड़े ही छुपे
रूस्तम निकले यार! मुझे चोदने की मन ही मन इच्छा रखते हो और मुझे भनक तक भी नहीं है।
वो उठी और मेरे तरफ चेहरा करके सामने की बैठ गई और मेरे जीन्स की बटन खोलकर लिंग को
बाहर निकाल लिया और लिंग की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगीं. मुझे अब खुद पर नियंत्रण करना
मुश्किल हो रहा था, मैं बोला- तुम्हें पता होगा कि मैं शादीशुदा हूँ. फिर यह काम गलत है. मैंने अपने
लिंग को छुड़ाने के असफल प्रयास किया, तब तक बबिता मेरे लिंग को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मैं
बाहर रहने के कारण विगत एक साल से पत्नी से नहीं मिला था, इसलिए मेरी सोयी हुई प्यास,
कामुकता जाग उठी और
काबू से बाहर हो गयी। मैं बबिता के बाल पीछे
से पकड़कर अपने लिंग को उनके मुँह की गहराइयों में उतारने लगा। करीब दस मिनट बाद मैंने
उनके मुख में ही अपना बीज छोड़ दिया। बीज छूटते ही उनका मुख मेरे बीज से भर गया तो लिंग
को अपने मुँह से निकलने की कोशिश की लेकिन मैंने निकलने नहीं दिया और अपनी बीज को पीने
को मजबूर कर दिया। करीब पाँच मिनट बाद उसे छोड़ दिया। उनकी सांसें फूलने लगी थी,
गहरी श्वास लेते हुए
अपने को नियंत्रित की, बोली- बड़े जालिम हो! ऐसे मुँह में अपना लिंग डाल रहे थे जैसे
योनि में डाल रहे हो, लेकिन मुझे मजा आ गया। अपने घाघरे के अंदरूनी भाग को उठाकर अपना मुख और मेरे लिंग
को पौंछने लगी तो मैं उसके पतले ओष्ठ को चूसने लगा। उसके मुँह से मेरे बीज की बास आ
रही थी. बबिता मुझे चुम्बन में सहयोग कर रही
थी, एक हाथ
से मेरे लिंग को सहला रही थीं. मेरा लिंग एक बार फिर अपने पूर्ण अवस्था में आ गया।
बबिता उठी मेरी
जीन्स को कच्छे सहित झट से नीचे कर दी, मुझे पास के संकीर्ण कुर्सीनुमा पेड़ पर बैठा दिया और
अपने घाघरे को उठाकर मेरे लिंग पर मेरी तरफ चेहरा कर कर बैठ गई। मेरा लिंग उनकी योनि
को पैंटी के ऊपर से ही स्पर्श किया तो मुखे एक सुखद एहसास मिला और अपने एक हाथ से उनकी
पैन्टी के योनि वाले भाग को एक तरफ किया और अपने लिंग को उनकी योनि के दोनों ओष्ठ के
बीच व्यवस्थित किया. उनकी योनि बिल्कुल ही गीली हो गई थी, फिर उनकी कमर पर अपने दिनों हाथों
से अपनी पकड़ को मजबूत किया और धीरे -धीरे उनकी कमर पर अपना दबाव बढ़ाते चला गया और लिंग
उनकी योनि की गहराइयों में डूबता चला गया लेकिन उसकी योनि टाइट थी तो मेरे लिंग पर
भी हल्का दर्द का अहसास होने लगा, लेकिन बबिता मेरे लिंग
को पूरी तरह अपनी योनि में डालने को बेताब थी, उन्होंने अपने को थोड़ा पीछे किया,
फिर बोली- अपने दोनों
हाथों से दबाव बढ़ाओ! और मैंने एक तेज धक्का दिया और मेरा लिंग उनकी योनि के अंदर उनकी
बच्चेदानी को छू गया। उन्होंने आउच… की उनका दर्द उनके चेहरे से दिख रहा था। कुछ देर यों
ही शान्त रहने के बाद मैं उनके चेहरे, गाल, गर्दन और जितना जा सकता था उनके स्तन को चूमने लगा और बबिता
धीरे धीरे धक्का लगाने लगी, फिर उन्होंने और तेज धक्के
लगाने शुरू कर दिए. उनके धक्के लगाने के अंदाज से पता चल रहा था कि वो जल्द ही चरमोत्कर्ष
को प्राप्त करना चाहती हों, करीब पंद्रह मिनट चुदाई के बाद वो थोड़ी अकड़ती हुई बड़बड़ाने लगी-
राज चोदो और जोर से, फाड़ दो मेरी चूत को… बहुत परेशान कर रही थी, मेरी बरसों की प्यास बुझा दो और वो
अपनी चूत मेरे लिंग पर तेजी से रगड़ने लगी, उम्म्ह… अहह… हय… याह… तेजी से उछल उछल कर चुदने लगी. उन्होंने अपने दोनों हाथों से
मेरे गर्दन को मजबूती से पकड़ी हुई थी और मैंने उनकी कमर को। बबिता मेरे गाल को अपनी दांतों से पकड़ती हुई तेजी से स्खलित
हो गई, उनकी
गरमा गर्म चूत के रस का अहसास मेरे लिंग पर हो रहा था. लेकिन मेरा अभी बाकी था,
वो इसी अवस्था में
मेरे शरीर पर निढाल पड़ी रही करीब दस मिनट तक; मेरा लिंग अभी भी उसकी चूत में ही
था। सामान्य होने के बाद मैं बोला- अभी मेरे नहीं हुआ है. तो वो बोली- मैं अभी कौन
सी भागी जा रही हूँ। मेरी चूत में अभी भी तेरा लिंग पड़ा हुआ है।
आगे गहरी खाई वो भी अंधेरी लेकिन चंद्रमा की रोशनी फैली
हुई थी, हम
दोनों एक दूसरे को सही ढंग से देख पा रहे थे। मैं बोला- एक बार अपनी दूध तो पिलाओ न
यार! आज तक अपने स्तन को छूने नहीं दिया, और आज एकदम मुझे ही चोद दिया। वो मुस्कुराती हुई बोली-
जब तुझे मैं पहली बार रेस्तरा में मिली थी, तब से ही बेताब थी लेकिन तूने ही
ध्यान नहीं दिया, आखिर में मुझे ही पहल करनी पड़ी। मैं बोला- यह जानते हुए कि मैं शादीशुदा हूँ फिर
भी तुम मेरे साथ संबंध बनाना चाहती थी? वो बोली- क्या करूँ… तुझे चाहने लगी थी. “तो कभी इजहार क्यों नहीं
किया?” डॉक्टरनी
साहिबा बोली- डर था कि कहीं तुम दूर ना चले जाओ। अब तुम छोड़ दोगे तो भी गम नहीं क्योंकि
मैं इस पल को याद कर जी लूँगी। ये बड़े ही यादगार पल हैं मेरे लिए! इसके लिए मैं विगत
एक माह से तैयारी कर रही थी। मुझ पर कितनों की नजर है, घर पर मेरी शादी की बात हो रही है
लेकिन मैं अपना पहला चुदाई तुमसे ही करवाना चाहती थी क्योंकि तुझे जीवन साथी नहीं बना
सकती तो कम से कम इस दर्द के एहसास के साथ तो जीवन काट सकती हूँ। शादी के बाद अपने
पति को धोखा नहीं देना चाहती हूँ। मैं तुम से बहुत प्यार करती हूँ और करते रहूँगी,
चाहूँगी कि अगले जन्म
में तुम ही मेरे पति हो। मैंने तो तुझे अपना पति मानकर स्वेच्छा से अपने आप को तुझे
समर्पित किया है। उनकी आँखों से आँसू की धारा बह रही थी। मैंने उनके आँसू को हाथ से
पौंछते हुए एक चुम्बन उनके गाल पर लिया और गले से लगा कर बोला- तुम्हें पाकर और तुम्हारे
समर्पण से मैं धन्य हुआ… तुमने तो अपनी अमूल्य संपत्ति मुझे समर्पित कर दी पर मेरे पास
देने को कुछ नहीं है। वो बोली- है… वो भी समय आने पर ले लूंगी। मेरा लिंग अभी भी उनकी चूत में ही
था पर अब थोड़ा शिथिल हो रहा था।
मैं बोला- बबिता
, अब हमें चलना
चाहिए, काफी
रात हो गई है. घड़ी पर नजर डाली तो नौ बजने को थे, मैं बोला- बबिता , तुम्हारा होस्टल का गेट बंद
होने का समय हो गया है, चलो चलते हैं! तो वो बोली- आज की रात मैं तुम्हारे साथ ही रहूँगी,
कल शाम को ही होस्टल
जाना है. “पर कहाँ और कैसे? इस पहाड़ी पर?” “ये तुझे सोचना है कि अपनी पत्नी को कैसे और कहाँ रखना है। अब तो मैं तुम्हारी ही
हूँ जब तक मेरी दूसरी शादी नहीं हो जाती।” मैं बोला- दूसरी? तो वो डॉक्टरनी बोली- हां…
एक आज और अभी जो हुई
और हो भी रही है। मैंने उनके गाल को एक बार फिर चूमा और एक हाथ से उसके स्तन को कस
के दबा दिया, बबिता ने आउच की आवाज की और मेरे गाल को
कस के काट लिया। मेरे लिंग में जो शिथिलता आ रही थी, वो दूर होने लगी, वो फिर कड़क होने लगा. मैं
लगातार एक हाथ से ही उनकी चोली के ऊपर से ही स्तन का एक एक करके मर्दन कर रहा था। अब
वो फिर से अपने कमर को आगे पीछे करते हुए चुदाई करने लगी. करीब बीस मिनट के चुदाई के
बाद हम दोनों स्खलित हुए।
फिर वहाँ से मैं डॉक्टर बबिता को अपने कमरे पर ले आया। मैं दो रूम का फ्लैट में
रहता था जिसका दरवाजा बाहर की तरफ खुलता था। अंदर आने के बाद देखा कि मेरी पैन्ट के
चैन वाले भाग पर हल्का खून का धब्बा दिखाई दिया और बबिता उसे देखकर मुस्कुराए जा रही थी। जब मैंने उनके घाघरे
को उठा कर देखा तो उसकी पैन्टी, घाघरा और जांघ पर खून के धब्बे दिखाई दिए, मैंने कहा- तुम बहुत बहादुर
हो जो पहली चुदाई का दर्द चुपचाप बर्दाश्त कर लिया? मेरी पत्नी तो तीन दिनों तक कराहती
रही थी और पास फटकने तक नहीं दिया था। वो बोली- एक ही बार में तूने उसकी चूत का भुरता
बना दिया होगा। जब मैं तुम्हारे ऊपर थी तो दो बार मेरा स्खलित हुआ, उसके बाद तुम्हारा! वहां
तो मैं अपनी इच्छा से तुमसे चुद रही थी, तुम अपनी पत्नी को अपनी इच्छा से चोद रहे होंगे तो निश्चित
तौर पर लंबे समय तक चोदे होंगे। “हां, वो तीन बार स्खलित होने के बाद हाथ जोड़कर विनती करने लगी तो
मैंने उसके मुँह में चोद कर अपना पानी उसके मुंह में डाल दिया था। उसके बाद तो मेरे
पास आने से घबराने लगी थी। एक माह बाद ही उसे चोद पाया था, वह भी उसके हिसाब से… जिससे उसे कोई समस्या न हो
और वह भी मजा ले।” बबिता बोली- तो लग रहा है कि आज मेरी बुर
की खैर नहीं। अभी तक तो मैंने तुम्हारे लिंग पर राज किया, अब तुम मेरे बुर पर राज करोगे। देखती
हूँ अभी भी तुम में वो दम है या नहीं!
मुस्कुराती हुई बबिता बाथरूम में चली गई। थोड़ी देर में फ्रेश होकर बबिता
नंगी ही बाहर निकली तो मैं उसके संगमरमरी बदन
को देखता ही रह गया, बोला- ये क्या, नंगी ही आ गई? तो वो बोली- अंदर नहीं तौलिया है… और यहाँ ना मेरा कोई कपड़ा… इसलिए नंगी ही बाहर आ गई। मैंने अपने
कपड़े धोकर अंदर ही सूखने डाल दिये हैं, कल तक सूख जाएंगे। मैं बोला- ठीक है. और मैंने अपने कमरे
के रेक से एक लेडीज नाइट सूट उसे पहनने के लिए दिया और मैं तौलिया लेकर वाशरूम में
चला गया। फ्रेश होकर निकला तो बबिता दो कॉफी
बनाकर किचन से निकल रही थी। मैं बोला- ये क्या, मैं बना देता ना! वो बोली- मैं तुम्हारी
अब मैम नहीं, बीवी हूँ, सुनो फ्रिज में मशरूम रखे थे, सब्जी बना रही हूँ, सब्जी रोटी खायेंगे और फिर पूरी रात तो… एक कातिल मुस्कान के साथ
मेरे गोद में आकर बैठ गई। मैं बोला- कॉफी तो पीने दोगी? तो बोली- क्यों नहीं… लो पियो! और अपनी कॉफी मुझे
पिलाने लगी और मेरे हाथ की कॉफी खुद पीने लगी. मैं बोला- सारा प्यार आज ही निछावर कर
दोगी? बबिता
बोली- कल शाम तक ही तो हूँ, उसके बाद एक सप्ताह बाद ही
तुम्हारे दर्शन होंगे। उस रात मैराथन चुदाई बबिता की हुई जिसमें वो चार बार स्खलित हुई। उसके बाद हम
दोनों नंगे ही सो गए। यह सिलसिला लगभग दो सालों तक चला उसके बाद मेरी पोस्टिंग गोपालगंज हो गई और हमारा मिलन बंद हो गया लेकिन संपर्क लगातार बना रहा



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